एक माह के शिशु के मस्तिष्क का अनोखा आपरेशन
शिशु देव यादव का जन्म समय पूर्व सात माह में ही हो गया था और जन्म के बाद उसने मां का दूध पीना भी बंद कर दिया था। इसका कारण यह था कि उसका मस्तिष्क ठीक से काम नहीं कर रहा था।
डाक्टरों ने बताया कि वह हाइड्रो सेफेलस बीमारी से ग्रसित है जिसमें विकास अवरुद्ध हो जाता है। शिशु की गंभीर स्थिति को देखते हुए हुए गुड़गांव स्थित आर्टेमिस हेल्थ इंस्टीट्यूट (एएचआई) के डाक्टरों ने उसका सफल आपरेशन कर उसे जीवनदान दिया है।
एएचआई के डाक्टरों ने पिछले सप्ताह करीब डेढ़ घंटे में देव का सफल आपरेशन किया और अब उसकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। देव का जन्म एएचआई में नहीं हुआ था। उसके परिवार वाले गुड़गांव से 10 किलोमीटर दूर रहते हैं।
डाक्टरों ने कहा कि आपरेशन के वक्त उसकी रोगप्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर थी और जन्म के वक्त उसका वजन मात्र 800 ग्राम था। जन्म के वक्त उसके अंग व त्वचा का पूरी तरह विकास भी नहीं हुआ था।
एएचआई के न्यूरोसर्जरी विभाग के डाक्टर अरुण सारोहा ने कहा, "देव उस बीमारी से ग्रसित था जिसमें मस्तिष्क में सेरेब्रोस्पेनियल द्रव्य (सीएसएफ) की मात्रा अधिक हो जाती है। यह एक ऐसा द्रव्य होता है, जिसमें हमारा दिमाग तैर रहा होता है। जन्म के वक्त एक शिशु के शरीर में इसकी नियत मात्रा होनी चाहिए और अगर यह मात्रा बढ़ जाए तब मस्तिष्क पर दबाव बढ़ जाता है और शिशु की गतिविधियां घटने लगती हैं। इसके बाद शिशु के शरीर का विकास थम जाता है।"
सारोहा ने कहा कि शिशु के विकास के क्रम में यह गड़बड़ी मां के पेट में होने के दौरान ही शुरू हो जाता है। यह बहुत गंभीर स्थिति होती है। 100 में एक शिशु ही इस तरह की बीमारी से ग्रसित होता है।
उन्होंने कहा कि हमने शिशु के शरीर में मस्तिष्क से लेकर पेट तक एक 45 सेंटीमीटर लंबी नली डाली जिसके जरिये मस्तिष्क से सीएसएफ की अतिरिक्त मात्रा को पेट में लाया गया और फिर उसे खींचकर बाहर निकाल लिया गया।
सारोहा ने कहा कि अब शिशु की हालत में सुधार हो रहा है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। उसने अब अधिक मात्रा में दूध पीना शुरू कर दिया है और उसका वजन एक किलोग्राम से अधिक हो गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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