वज्रपात की 64 किलोमीटर लंबी लकीर कैमरे में कैद

पूरी प्रचंडता के साथ बिजली चमकने की इस परिघटना को विज्ञान की भाषा में जाइगेंटिक जेट यानी विराट विद्युत प्रवाह की संज्ञा दी गई है। जब यह बिजली तूफानी बादल को चीरते हुए चमकी तो पहले से चौकस कैमरे ने नजारे को कैद कर लिया। ऐसी बिजली अंतरिक्ष के निचले हिस्से यानी आयनमंडल तक चमकती है और बिजली चमकने की सामान्य घटनाओं से यह कई मायने में भिन्न होती है। व्रजपात की यह लकीर सामान्य वज्रपात की लकीर से कई गुना बड़ी होती है।

उत्तरी कैरोलिना के ड्यूक विश्वविद्यालय में इलेक्ट्रिकल एवं कंप्यूटर इंजीनियर स्टीवन क्यूमर के नेतृत्व में इस कार्य को अंजाम दिया गया। वह कहते हैं, "आकाश में धुंध छाए होने और कम दृश्यता के बावजूद हम इस नजारे को कैद करने में सफल रहे।" ऐसे नजारे कितने दुर्लभ होते हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2001 से लेकर अब तक वैज्ञानिकों को सिर्फ पांच बार इसे कैमरे में कैद करने में कामयाबी मिली है।

नेशनल सायंस फाउंडेशन के वायुमंडल विज्ञान विभाग के कार्यक्रम निदेशक ब्रैड स्मल कहते हैं, "इससे हमें वज्रपात के चुंबकीय क्षेत्र की सटीक माप करने में भी आसानी होगी। तूफानी बादल के शीर्ष से लेकर आयनमंडल के निचले छोर तक का यह नजारा वाकई अद्भुत है। इससे हमें इसके विद्युत परिपथ का बारीक अध्ययन करने में आसानी होगी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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