आधुनिक तकनीक से और लंबे हुए पुलिस के हाथ

चंडीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एस.एस. श्रीवास्तव ने कहा, "पिछले दो साल में आधुनिक तकनीक और जांच से जुड़ी वैज्ञानिक विधियां पुलिस के कार्यकलाप का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं। इससे हमें बहुत कम समय में महत्वपूर्ण मामलों को सुलझाने में मदद मिली है।"

श्रीवास्तव के मुताबिक पुलिस स्टेशनों में क्लोज सर्किट टीवी कैमरे (सीसीटीवी), पुलिस कंट्रोल रूम (पीसीआर) वैन में जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम), हाई-टेक कंप्यूटर लैब की मदद लेने और अधिकारियों को आधुनिक तकनीक और सॉफ्टवेयर का ज्ञान देने से हमें काफी फायदा हुआ है।

इसके अलावा पुलिस ने फिंगरप्रिंट ब्यूरो, साइबर क्राइम सेल और सामुदायिक पुलिस प्रणाली की मदद से काफी हद तक अपने आप को तेजतर्रार बना लिया है।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आधुनिक तकनीक के उपयोग के कारण मामलों का जल्द से जल्द निपटारा हुआ है और उन्हें लेकर त्वरित फैसले भी सुनाए गए हैं।

पुलिस रिकार्ड के मुताबिक इस साल जनवरी से जून तक 732 मामलों में लोगों को सजा सुनाई जा चुकी है जबकि 585 मामलों में लोग बरी किए गए हैं जबकि पिछले साल कुल 704 मामलों में सजा सुनाई गई थी जबकि 457 मामलों में रिहाई हुई थी।

वर्ष 2008 में पुलिस ने आठ पेचीदे मामलों को सुलझाने में सफलता हासिल की थी। इनमें से एक मामला जर्मनी की पर्यटक के साथ बलात्कार से जुड़ा था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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