ईरान में महिला मंत्रियों पर विवाद

ईरान में राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के मंत्रिमंडल में महिलाओं के मनोनयन को लेकर विरोध शुरू हो गया है. ईरान के रुढ़िवादी मौलवियों ने राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के उस प्रस्ताव का विरोध किया है, जिसमें उन्होंने अपने नए मंत्रिमंडल में तीन महिलाओं को शामिल करने की बात कही है.
कट्टरपंथी सांसद मोहम्मद तग़ी रहबर का कहना है कि जब बात प्रबंधन की आती है, तो महिलाओं की योग्यता पर धार्मिक संदेह होता है.
सांसद रहबर का दावा है कि मौलवियों के उनके गुट के कई सांसद भी उनकी तरह ही विचार रखते हैं. ईरान की संसद में इस गुट का बहुमत है.
वर्ष 1979 की क्रांति के बाद से इस्लामी गणराज्य ईरान में कोई भी महिला मंत्री नहीं रही है. पाँच अगस्त को महमूद अहमदीनेजाद ने दूसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ ली है.
बुधवार को उन्होंने अपने नए मंत्रियों के नाम की घोषणा की. इस महीने के आख़िर में सांसद इन मंत्रियों के नाम पर मतदान शुरू करेंगे.
मोहम्मद तग़ी रहबर का कहना है कि आयतुल्ला नसीर मकरेम शिराज़ी और लुत्फ़ुल्लाह सफ़ी गोलपायग़नी समेत प्रमुख ईरानी मौलवियों को महिलाओं को मंत्रियों के रूप में चुने जाने पर संदेह है और वे चाहते हैं कि राष्ट्रपति अहमदीनेजाद इस पर फिर से विचार करें.
उन्होंने बताया कि उनका संसदीय गुट देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्ला अली ख़ामनेई की भी राय लेने की कोशिश कर रहा है.
इसफ़हान शहर के एक शीर्ष मौलवी आयतुल्ला यूसुफ़ तबातबई ने भी राष्ट्रपति अहमदीनेजाद के इस फ़ैसले के विरोध में अपनी राय व्यक्त की है.
ईरान के एक रुढ़िवादी अख़बार तेहरान इमरोज़ के मुताबिक़ उन्होंने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि राष्ट्रपति ने महिला मंत्रियों के बारे में जो कहा है, उसे संसद की मंज़ूरी नहीं मिलेगी."
राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने मंत्रियों की जो सूची पेश की है, उसके मुताबिक़ महिला मंत्री स्वास्थ्य, समाज कल्याण और शिक्षा मंत्रालय का ज़िम्मा संभालेंगी.
जानकारों का कहना है कि अहमदीनेजाद को सुधारवादियों के विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है, जो कहते हैं कि उनकी सरकार वैध नहीं हैं. इसके अलावा अर्जेंटीना और इसराइल ने ईरान के नए रक्षा मंत्री के रूप में अहमद वहीदी के मनोनयन का विरोध किया है.
अहमद वहीदी वर्ष 2007 से उस सूची में है, जिनकी इंटरपोल को तलाश है. ये मामला अर्जेंटीना में एक यहूदी केंद्र पर हुए बम हमले से जुड़ा हुआ है. वर्ष 1994 में हुए इस हमले में 85 लोग मारे गए थे.


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