लिट्टे के खात्मे में भारत का भी हाथ

नितिन ए. गोखले द्वारा लिखित पुस्तक 'श्रीलंका: फ्रॉम वार टू पीस' में यह खुलासा किया गया है। इसके मुताबिक भारतीय नौसेना ने श्रीलंका सरकार को खुफिया जानकारी देने और हथियारों से लैस लिट्टे के कम से कम दर्जन भर ठिकानों को नेस्तनाबूद करने में मदद पहुंचाई।
सार्वजनिक तौर पर हाथ खींचा
गोखले के अनुसार भारत ने कई तरीकों से श्रीलंका को मदद की। हालांकि भारत ने घरेलू राजनीतिक मजबूरियों के चलते श्रीलंका को हथियार मुहैया कराने और उसका समर्थन देने से सार्वजनिक तौर पर हाथ खींच लिया था। क्योंकि कांग्रेसनीत केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के समर्थन पर टिकी थी।
गोखले कहते हैं, "यूं तो सार्वजनिक तौर पर भारत ने श्रीलंका को खतरनाक हथियारों की खेप देने से मना कर दिया था लेकिन 2006 के शुरुआत में उसने श्रीलंकाई वायु सेना को पांच एमआई-17 हेलिकॉप्टर उपहार में दिए थे।" गोखले के मुताबिक सरकार ने इस शर्त के साथ श्रीलंका को ये हेलिकॉप्टर उपलब्ध कराए थे कि वे श्रीलंकाई वायुसेना के रंगों में उड़ान भरेंगे। क्योंकि वह डीएमके को नाराज नहीं करना चाहती थी।
गश्ती पोत भेंट किया था
उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 में भारतीय तट रक्षकों की तरफ से श्रीलंकाई नौसेना को सुकन्या अपतटीय गश्ती पोत भेंट किया था। लिट्टे और श्रीलंकाई सैनिकों के बीच संघर्ष के दौरान लिट्टे विद्रहियों से घिरी सेना की कई टुकड़ियों को बचाने में इस पोत ने अहम भूमिका निभाई।
इस पुस्तक में गोखले ने यह दावा भी किया है कि भारत ने लिट्टे के बारे में श्रीलंका को खुफिया जानकारियां भी मुहैया कराई। पुस्तक में लिट्टे प्रमुख वी. प्रभाकरण के अंतिम दिनों के बारे में भी बताया गया है। पुस्तक के मुताबिक प्रभाकरण ने प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या का आदेश देकर अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी और भयंकर रणनीतिक भूल की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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