उत्तर प्रदेश में बाढ़ के कहर से अब तक 41 की मौत
नेपाल से पानी छोड़े जाने और भारी बारिश के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश में बहने वाली घाघरा, सरयू, शारदा, राप्ती, बूढ़ी राप्ती, गंडक और घोघी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इन नदियों के उफान पर आने से सिद्धार्थनगर, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर, श्रावस्ती, कुशीनगर, गोरखपुर, बाराबंकी, गोंडा, देविरया, फैजाबाद और सिद्धार्थनगर जिलों के करीब 4,000 गांव बाढ़ से जलमग्न हो गए हैं और पांच लाख से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। हजारों हेक्टेयर फसल बाढ़ के कारण चौपट हो गई है। लोग घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक बाढ़ से 41 लोगों को मौत हो चुकी है। बाढ़ से बहराइच और लखीमपुर खीरी जिले में सबसे विकट स्थिति है। दोनों जिलों में 20 से ज्यादा लोगों की बाढ़ में डूबकर मौत हो गई। बाढ़ से लखनऊ-बहराइच मार्ग डूब गया है, जिससे राजधानी से बहराइच का सीधा सड़क संपर्क टूट गया है।
बहराइच के जिलाधिकारी सुभाष चंद्र शर्मा ने आईएएनएस को बताया, "जिले की चार तहसीलों में से तीन बाढ़ से प्रभावित हैं। इन तहसीलों के 250 गांव पानी में डूब गये हैं, जिससे दो लाख लोग बेघर हो गये हैं। घाघरा नदी के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है लेकिन अभी भी वह खतरे के निशान से 85 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।"
शर्मा ने बताया कि प्रांतीय सशत्र बल (पीएसी) के जवानों की मदद ली जा रही है और प्रभावित लोगों को लगातार 250 मोटरबोट तथा नौकाओं की मदद से सुरक्षति स्थानों की तरफ ले जाया जा रहा है।
लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी समीर वर्मा ने बताया कि धौरहरा, पलिया और निघासन तहसील में शारदा, घाघरा और नेपाल से आने वाली सुहेली और मोहाना नदियों के उफान पर आने से करीब 200 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।
उन्होंने बताया, "गोंडा-मैलानी रेलमार्ग मिंहीपुरवा के निकट पानी में डूब जाने के कारण रेलगाड़ियों का आवागमन फिलहाल बाधित है। सिद्धार्थनगर में बूढ़ी राप्ती खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जिले के 350 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ से यहां पर एक लाख बेघर हैं। गोरखपुर में 215 गांव जलमग्न हो गये हैं, जिससे 1.5 लाख लोग बेघर हो गए हैं।"
उनके मुताबिक सीतापुर में घाघरा और शारदा नदी, पीलीभीत में शारदा, गोंडा और देविरया में घाघरा, श्रावस्ती में राप्ती व सरयू नदी और कुशीनगर में गंडक नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सíवस।


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