सुधींद्र कुलकर्णी ने छोड़ा भाजपा का साथ (लीड-1)
कुलकर्णी ने पत्रकारों से कहा, "पार्टी के साथ मेरे गहरे वैचारिक मतभेद हैं। मैं अपने विचारों को प्रति ईमानदारी और पार्टी के प्रति अनुशासन बरतना चाहता हूं इसलिए मैंने पार्टी से बाहर आना ही बेहतर समझा।"
उन्होंने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा, "आज के बाद मैं स्वतंत्र हो जाऊंगा। मैं अब अपने जैसे विचार वाले अन्य दलों के सदस्यों के साथ मिलकर काम करूंगा।" उन्होंने किसी भी राजनीतिक दल का दामन थामने की संभावना से इंकार कर दिया।
कुलकर्णी ने यह स्पष्ट किया कि उनके पार्टी छोड़ने का जसवंत सिंह प्रकरण से कोई लेना देना नहीं है। ज्ञात हो कि पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह ने हाल ही में 'जिन्ना-भारत, विभाजन, आजादी' नामक पुस्तक लिखी है, जिसमें उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना की तारीफ की है और सरदार वल्लभ भाई पटेल को पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराया है। इस पुस्तक के विमोचन के दो दिन के बाद जसंवत को भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था।
उन्होंने कहा, "मैंने तो कुछ सप्ताह पहले ही पार्टी छोड़ने का निर्णय कर लिया था। मैंने आडवाणीजी को अपने इस फैसले से अवगत करा दिया था। पार्टी छोड़ने के मेरे फैसले का जसंवत सिंह के दुर्भाग्यपूर्ण प्रकरण से कोई लेना देना नहीं है।"
कुलकर्णी ने यह मानने से इंकार किया कि भाजपा अपने लक्ष्य से फिसल रही है। उन्होंने कहा, "भाजपा बहुत मजबूत है। पार्टी में बहुत लचीलापन है। वह मजबूत होती जाएगी।"
उन्होंने कहा कि वह भविष्य में भी भाजपा के शुभेच्छु बने रहेंगे। उन्होंने कहा, "आडवाणीजी और अटलजी के प्रति मेरे मन में अपार श्रद्धा है। इनके साथ मैंने 13 वर्षो तक काम किया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications