साइबर खतरे के खिलाफ रक्षा प्रतिष्ठानों की तैयारी तेज
नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। लगातार बढ़ते साइबर हमलों के कारण भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों ने अब साइबर युद्ध की तैयारी करनी आरंभ कर दी है।
साउथ ब्लाक स्थित रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को नियमित अंतराल पर फर्जी ई-मेल पते हासिल हो रहे हैं,इनका उद्देश्य मंत्रालय की कंप्यूटर व्यवस्था में सेंध लगाना है।
मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया,"हमें नियमित अंतराल पर थल सेनाध्यक्ष के सचिवालय,निदेशक मीडिया,मीडिया सेल आदि के नाम के फर्जी ई-मेल पते मिलते रहते हैं। हम जानते हैं कि ये पते फर्जी हैं,इसलिए हम इन्हें नहीं खोलते।"
हाल ही में रक्षा संबंधी मामलों को देखने वाले पत्रकारों को रक्षा प्रेस संबंध (डीपीआर) के ई-मेल पते से भारत के खिलाफ पाकिस्तानी सेना की योजना की जानकारी भेजी गई थी। रक्षा मंत्रालय ने इसका तुरंत संज्ञान लिया और कार्रवाई आरंभ की।
पिछले वर्ष सैन्य कमांडरों की बैठक में साइबर सूचना तंत्र की सुरक्षा को डिवीजन स्तर तक मजबूत करने का फैसला किया गया था।
डिवीजन स्तर तक साइबर सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के साथ ही सेना के शीर्ष अधिकारियों ने सैन्य साइबर सुरक्षा संस्थान से नियमित अंतराल पर सूचना तंत्र की जांच कराने की जरूरत पर भी बल दिया।
एक अधिकारी ने बताया कि उनके साइबर विशेषज्ञ समय समय पर संभावित साइबर घुसपैठ के खिलाफ जांच करते रहते हैं।
जांच के दौरान विशेषज्ञ पासवर्ड की क्षमता की जांच करते हैं। सैन्यकर्मियों को शब्दों और अंकों के मेल से बने पासवर्ड का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
इससे पहले सेना ने एक आदेश जारी करके सभी कर्मचारियों को ओरकुट और फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किं ग वेबसाइटों पर अपना ओहदा और तैनाती स्थल जैसी कार्य से संबंधित जानकारी नहीं देने का निर्देश दिया था। जिन लोगों ने पहले से यह जानकारी उपलब्ध कराई थी,उन्हें इसे हटाने को कहा गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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