71 वर्षीय पूर्व सांसद करेंगे एम.ए(संशोधित)

(इससे पूर्व जारी किए गए इसी समाचार में संशोधन है, 'एम.फिल' के स्थान पर 'एम.ए' है। )

ब्योमकेश बिस्वाल

भुवनेश्वर, 23 अगस्त (आईएएनएस)। कहा जाता है कि यदि आप के अंदर मजबूत इच्छा शक्ति है तो इसमें उम्र कभी आड़े हाथों नहीं आएगी। पूर्व सांसद और दो बार विधायक रह चुके 71 वर्षीय नारायण साहू इसी जज्बे को चरितार्थ कर रहे हैं। लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहने के बाद अब वह दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर (एम.ण्) होना चाहते हैं।

साहू ने हाल ही में उत्कल विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में दाखिला लिया। उन्होंने वर्ष 1963 में अर्थशास्त्र से स्नातक किया था, जिसके बाद में उन्होंने राजनीति में कदम रखा।

साहू वर्ष 1971 और 1974 में पाल्लहारा विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में उड़ीसा विधानसभा पहुंचे। वह वर्ष 1980 में देवगढ़ से सांसद भी चुने गए थे लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनका राजनीति से मोहभंग हो गया।

साहू ने आईएएनएस से कहा, "मेरा राजनीति करियर सफल रहा है लेकिन इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजनीति से मेरा मोहभंग हो गया। जब मैंने उम्र के 70वें पड़ाव में प्रवेश किया तो सोचा कि मुझे तो अभी जिंदगी में काफी कुछ करना है।"

साहू ने कहा, "पहले मैंने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर करने का सोचा लेकिन फिर ख्याल आया कि इस उम्र में मेरे लिए दर्शनशास्त्र एक अच्छा विषय साबित होगा क्योंकि मैं जीवन के तीसरे चरण यानि वानाप्रस्थ में हूं।"

साहू ने कहा कि जब उन्होंने स्नातोकोत्तर डिग्री की पढ़ाई करने का मन बनाया तो उन्हें कुछ समस्या भी आई। उन्होंने कहा पुराने प्रमाणपत्रों को खोजने में उन्हें काफी दिक्कतें आई।

साहू ने कहा कि काफी खोजबीन करने के बाद उन्हें पुराने शैक्षणिक प्रमाणपत्र मिल गए। उन्होंने कहा कि एम.ए में दाखिला लेने के लिए उन्होंने प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया। परीक्षा में सफल होने के बाद वह अब नियमित रूप से विश्वविद्यालय आते हैं।

साहू ने कहा कि कक्षा में सभी उनसे उम्र में काफी छोटे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ शिक्षक भी उनसे उम्र में छोटे हैं। पूर्व सांसद ने कहा कि वह युवाओं से दोस्ती कर रहे हैं।

साहू एक समय में उत्कल विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य भी थे। उस समय उनके पास छात्रों को छात्रावास मुहैया करवाने का फैसला करने का अधिकार था। अब वह खुद विश्वविद्यालय के छात्रावास में रहना चाहते हैं।

दो बेटे और चार बेटियों के पिता साहू का कहना है कि उनका परिवार फिर से अध्ययन करने के फैसले का समर्थन कर रहा है। उन्होंने कहा, "मेरा उत्साह सबसे अधिक मेरे पोते-पोतियां बढ़ा रही हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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