'राजस्थान के सभी जिलों को राष्ट्रीय बागवानी मिशन में शामिल करें'
बुरड़क ने शनिवार को नई दिल्ली के कृषि भवन में केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार से भेंट कर यह मांग की। राष्ट्रीय बागवानी मिशन को अधिक प्रभावी बनाने के सम्बन्ध में सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि सूक्ष्म सिंचाई योजना के अन्तर्गत ड्रिप व फव्वारा लगाने के लिये प्रति कृषक अधिकतम सीमा पांच हैक्टेयर को समाप्त किया जाना चाहिये। यह इसलिये भी आवश्यक है कि सिंचाई जल की उपलब्धता उत्तरोत्तर कम होती जा रही है। पानी को बचाना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
बुरड़क ने मांग की कि राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुये राजस्थान के शेष बचे जिलों को भी मिशन में जोड़ा जाये ताकि सूखे के स्थिति में उद्यानिकी फसलें, विशेषकर बगीचे किसानों को आर्थिक सम्बल प्रदान कर सकें। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन में भारत सरकार को प्रस्तुत किये जाने वाले परियोजना प्रस्तावों की स्वीकृति में काफी समय लग जाता है। मंत्रालय को इसके लिये एक समय सीमा निर्धारित करनी चाहिये।
बुरड़क ने बताया कि राज्य के कम जल वाले क्षेत्रों के किसानों के बीच फल के बगीचे लोकप्रिय हो रहे हैं। अत: इन बगीचों की अधिकतम क्षेत्रों की सीमा को चार हैक्टेयर से बढ़ा कर कृषकों की आवश्यकता अनुसार किया जाना उपयुक्त होगा अन्यथा उसे 6 से 8 हैक्टेयर तो किया ही जाना चाहिये।
उन्होंने मांग की कि राज्य के कृषि एवं उद्यान विभागों द्वारा वर्षा जल के संग्रहण की दिशा में की जा रही कोशिशों को प्रोत्साहित करने के लिये वर्ष 2009-10 की कार्य योजना में स्वीकृत भौतिक लक्ष्यों को 150 से बढ़ा कर 500 किया जाए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications