देश में शुष्क भूमि कृषि मिशन की स्थापना हो : बुरड़क
बुरड़क ने शनिवार को नई दिल्ली के कृषि भवन में केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार से भेंट कर यह मांग की। उन्होंने कहा कि इस मिशन के बनने से सूखा पीड़ित क्षेत्रों में कृषि उत्पादन पर पड़ने वाले विपरीत असर को न्यूनतम करने के लिये अनुसंधान, प्रयोग तथा तकनीक के प्रचार-प्रसार के साथ ही कृषकों के लिये सूखे से लड़ने की विशेष योजनाओं का निर्माण हो सकेगा एवं उन्हें वित्तीय सहायता तथा अनुदान आदि उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही तिलहन व दलहन आदि के आयात पर केंद्र सरकार के स्तर पर खर्च हो रही करोड़ों रुपए की विदेशी मुद्रा की भी बचत हो सकेगी।
बुरड़क ने विश्वास व्यक्त किया कि व्यापक एवं विस्तृत उद्देश्य वाला, यह नया एवं प्रभावी मिशन यदि सूखा पीड़ित क्षेत्रों को केन्द्र बिन्दु बना कर कार्य करता है तो बार-बार पड़ने वाले सूखे से लड़ने के लिये तकनीकी आधार प्राप्त करने के अलावा इन क्षेत्रों में कृषि उत्पादन में भी काफी हद तक स्थिरता पाई जा सकेगी और मेहनतकश किसान लाभान्वित हो सकेंगे।
उन्होंने बताया कि देश का बहुत बड़ा हिस्सा पांच वषरें में से लगभग तीन वर्ष सूखे और अकाल का सामना करता है। इन परिस्थितियों का मुख्यत: राजस्थान, महाराष्ट्र तथा गुजरात जैसे राज्यों को अधिक सामना करना पड़ता है। यह पिछले 50 वषरें की सच्चाई है। इससे देश के कुल कृषि उत्पादन व उत्पादकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। साथ ही देश की अर्थव्यवस्था विश्ेाष तौर पर कृषि अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सूखे के असर को कम करने के लिये स्थायी प्रयास किये जाएं। ये प्रयास समन्वित रूप में किये जाएं तो किसानों को अधिक फायदा होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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