अफगानिस्तान में लोकतंत्र की गहराती जड़ें संतोषदायक : भारत
देश के विभिन्न हिस्सों में तालिबान आतंकियों द्वारा जारी हिंसा और धमकियों के बीच अफगानिस्तान में 20 अगस्त को दूसरा राष्ट्रपति का चुनाव संपन्न हुआ है।
यहां विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, "अफगानी जनता का पुराना मित्र होने के नाते तथा दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) का एक सदस्य होने के नाते हमारे लिए अफगानिस्तान में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गहराती जड़ों को देखना सुखदायी है।"
प्रत्याशियों ने जिस तरह से अपना प्रचार अभियान चलाया और मतदाताओं ने अपने घरों से निकल कर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, भारत ने इस पर भी अपनी खुशी जाहिर की है।
बयान में कहा गया है, "आतंकी संगठनों की ओर से मिल रही धमकियों और सुरक्षा के जटिल माहौल के बावजूद प्रत्याशियों ने निर्भय होकर अपना चुनाव प्रचार किया और बड़े पैमाने पर नए मतदाताओं ने मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराया। हिंसा व धमकियों के बावजूद इस चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले अफगानी मतदाताओं और सभी उम्मीदवारों के साहस और दृढ़निश्चय की हम प्रशंसा करते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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