'पटेल ने ही लगाई थी संघ पर पाबंदी'

जसवंत सिंह ने कहा कि "मुझे नहीं मालूम की बीजेपी किस आस्था की बात कर रही है, जबकि सरदार पटेल ही वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया। उन्होंने कहा कि मुझे मालूम नहीं कि मैंने मूल आस्था के किस अंश को छेड़ा है"।
जसवंत सिंह ने बीजेपी को यह भी याद दिलाया कि जब आडवाणी ने जिन्ना को महान बताया था तह पार्टी ने उनके खिलाफ कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया था, बल्कि पार्टी उनके साथ खड़ी थी। ऐसे में पार्टी उनके साथ भेदभव पूर्ण रवैय्या अपना रही है।
खुद को आरएसएस से अलग बताते हुए जसवंत ने साफ कहा कि "मैं कभी आरएसएस से जुड़ा नहीं रहा न ही मेरे कभी इनके साथ संबंध ही रहे हैं"। नरेंद्र मोदी सराकर द्वारा उनकी किताब पर गुजरात में लगाए गए प्रतिबंध की आलोचना करते हुए जसवंत ने कहा कि यह किताब पर नहीं, बल्कि सोच पर प्रतिबंध है। सबको व्यक्तिगत रूप से और मिलकर इस बारे में सोचना चाहिए।
जसवंत सिंह को उनकी किताब- 'जिन्ना: भारत, विभाजन, आजादी' में जिन्ना को विभाजन के दोष के लिए बरी करने और जवाहरलाल नेहरू के साथ सरदार वल्लभ भाई पटेल पर उंगली उठाने के लिए बुधवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से बर्खास्त कर दिया गया। आरएसएस ने जसवंत सिंह के विचारों को खारिज करते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए दबाव बनाया था।


Click it and Unblock the Notifications