संघ से मेरा कोई वास्ता नहीं: जसवंत

शिमला से दिल्ली पहुंचने के बाद अपने आवास पर मीडिया से चर्चा में जसवंत ने कहा, "मेरा आरएसएस से कोई लेना देना नहीं है, यह सबको मालूम है। मैं स्वयंसेवक भी नहीं रहा कभी।" उन्होंने कहा, "आरएसएस ने जो सिखाया उससे कहीं ज्यादा मैंने फौज में सीखा है।"
इससे पहले जसवंत ने बुधवार को एक समाचार चैनल से बातचीत में स्वयंसेवकों को 'सुविधाभोगी' बताते हुए आरएसएस की कड़ी आलोचना की थी।
सुविधाभोगी हो चुके हैं स्वयंसेवक
उन्होंने कहा था, "पिछले 30 से 40 वर्षो में आरएसएस में बहुत बदलाव आया है। आरएसएस के स्वयंसेवक भाजपा में कई जिलों व राज्यों के प्रभारी हैं। वे भी भ्रष्टाचार से प्रभावित होते हैं। हिंदी में एक शब्द है 'सुविधाभोगी'। वे सुविधाभोगी हो चुके हैं। स्वयंसेवकों को भी इस पर आत्मावलोकन करना होगा।"
अपनी पुस्तक 'जिन्ना-भारत, विभाजन, आजादी' पर सफाई देते हुए जसवंत ने कहा, "मैंने पुस्तक लिखकर पार्टी के सिद्धांतों का कोई उल्लंघन नहीं किया है। मैं किताब लिख रहा था यह सबको पता था और बहुत पहले पता था।
आडवाणीजी की आत्मकथा 'मेरा देश, मेरी जिंदगी' का जिस दिन विमोचन हुआ था उसी दिन मैंने मंच से कहा था कि मैं जिन्ना पर पुस्तक लिख रहा हूं। उस कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद थे। बेहतर होता कोई फैसला लेने से पहले वे मेरी किताब पढ़ लेते।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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