प्रतिबंध के बावजूद गोटमार मेले में पत्थरबाजी, 48 घायल
छिंदवाड़ा जिले के पंढुर्ना में वषरे से चली आ रही परम्परा के मुताबिक हिन्दु कैलेण्डर के भाद्रपद अमावस्या के अगले दिन गोटमार मेला लगता है। शुक्रवार को यह मेला लगा और इसमें सावरगांव तथा पांढुर्ना के लोगों ने एक दूसरे पर पत्थरबाजी की। पुलिस और प्रशासन के नुमाइंदे गोटमार मेले की पत्थरबाजी की परम्परा को रोक नहीं पाए।
मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने गोटमार मेले की पत्थरबाजी को अमानवीय करार देते हुए रोक लगाने के जिला प्रशासन को निर्देश दिए थे। जिला प्रशासन ने पांढुर्ना और सावरगांव के लोगों को हिदायत दी थी कि वे मेले में तो जाएं परन्तु पत्थरबाजी न करें। इतना ही नहीं आयोजन स्थल पर निषेधाज्ञा धारा 144 लागू की थी और भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया था।
छिंदवाड़ा के कलेक्टर निकुंज श्रीवास्तव ने आईएएनएस को बताया कि गोटमार मेले में इस बार पिछले सालों की तुलना में बहुत कम पत्थरबाजी हुई है। यही कारण है कि सिर्फ 48 लोग ही घायल हुए है। इनमें से 47 को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। पत्थरबाजी में पुलिस जवानों को भी चोटें आई हैं। बीते वषरे में घायलों की संख्या 500 के आस पास रहा करती थी।
पांढुर्ना में एक देवी का मंदिर है और वषरें से यहां गोटमार मेला लगता आ रहा है। परम्परा के मुताबिक मंदिर के करीब से निकलने वाली जमुना नदी के बीचों बीच सावरगांव के लोग एक पलाश का पेड़ पताका लगाकर गाड़ते हैं। इसे पांढुर्ना के लोग काट कर ले जाते हैं। इस खेल को लेकर दोनों गांव के लोग नदी के दोनों ओर इकट्ठा होकर एक दूसरे पर पत्थरबाजी करते हैं। शुक्रवार को भी ऐसा ही हुआ। मान्यता है कि पत्थरबाजी न करने पर क्षेत्र को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
कलेक्टर श्रीवास्तव ने बताया है कि इस बार गोटमार मेले में कई अन्य खेलों का भी आयोजन किया गया था जिसमें बडी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। वे आगे कहते है कि प्रशासन जनजागृति अभियान के जरिए मेले में होने वाली शराबखोरी तथा जुआ को पूरी तरह रोकने में सफल रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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