युवाओं की जरूरत, पर आडवाणी बने रहेंगे नेता : भाजपा (राउंडअप)
चिंतन बैठक की समाप्ति के बाद संवाददाताओं से चर्चा करते हुए पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा, "चिंतन बैठक में आम राय यही बनी कि आडवाणी ही हमारा नेतृत्व करेंगे। पार्टी को युवाओं की जरूरत है पर युवाओं के मामले में हम अन्य दलों से कहीं आगे हैं। भाजपा के साथ सर्वाधिक संख्या में युवा हैं। मंडल से लेकर ऊपर तक बस उन्हें खड़ा करने की आवश्यकता है। इनका प्रतिशत बढ़ाया जाना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि चिंतन बैठक में पार्टी की 'भविष्य की राह' पर विस्तार से चर्चा हुई। इस संबंध में एक कार्ययोजना तैयार की गई है जिसे सितम्बर-अक्टूबर महीने में होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। इसकी रूपरेखा दिल्ली में पार्टी महासचिवों की बैठक में तय की जाएगी।
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, "भाजपा एकात्म मानववाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अपनी विचारधारा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और प्रतिबद्ध रहेगी। हम अपने दर्शन और अपनी विचारधारा से कोई समझौता नहीं करेंगे।" उन्होंने कहा कि पार्टी किसी भी सूरत में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करेगी।
इससे पहले आडवाणी ने चिंतन बैठक में आए नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह को पार्टी से निष्कासित किए जाने का फैसला कष्टदायक लेकिन जरूरी था। आडवाणी ने कहा कि आंतरिक कलह के कारण पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है।
पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "चिंतन बैठक में आडवाणीजी ने कहा कि जसवंतजी को निष्कासित किए जाने का फैसला दु:खद था। वह 30 साल पार्टी के साथ रहे लेकिन कार्रवाई जरूरी थी।"
जसवंत द्वारा उठाए गए इस सवाल पर भी आडवाणी ने सफाई दी कि सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध लगाया था। बकौल सुषमा आडवाणी ने कहा, "सरदार पटेल ने तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कहने पर आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया जरूर था लेकिन एक महीने के अंदर ही उन्होंने नेहरू को पत्र लिखकर कहा था कि महात्मा गांधी की हत्या के लिए आरएसएस दोषी नहीं है।"
सुषमा के मुताबिक आडवाणी ने कहा कि देश की राजनीति में कांग्रेस का एकाधिपत्य खत्म करने के लिए गठबंधन की राजनीति आवश्यक है। आडवाणी ने कहा,"वर्ष 1999 से 2009 के बीच भाजपा को दो लोकसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। यह आत्ममंथन का विषय है लेकिन निराशा का कोई कारण नहीं है। लोकसभा में हम आज भी प्रमुख विपक्षी पार्टी हैं और आठ राज्यों में हमारी सरकारें हैं।"
आडवाणी ने कहा, "कलह से पार्टी की छवि को बहुत नुकसान पहुंचा है। संवाद से हमें इन समस्याओं का हल निकालना चाहिए। संवाद ही हमारी ताकत है जो अन्य दलों में नहीं दिखता। कांग्रेस में सोनिया गांधी, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में मायावती, समाजवादी पार्टी (सपा) में मुलायम सिंह यादव और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में लालू प्रसाद का हुक्म चलता है।"
आडवाणी ने शीर्ष पदों पर बैठे पार्टी के नेताओं से अपील की कि वे अपने आचरण से आदर्श स्थापित करें जिससे जनता में उम्मीद जगे, कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास जगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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