बिहार के कई जिलों में बाढ़ से लोग बेघर (लीड-1)
जल संसाधन विभाग के पटना स्थित बाढ़ नियंत्रण कक्ष के मुताबिक बागमती और बूढ़ी गंडक शुक्रवार को कुछ स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बाढ़ नियंत्रण कक्ष में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता देवेनद्र प्रसाद ने शुक्रवार को बताया कि बागमती नदी रूनीसैदपुर में खतरे के निशान से 2़84 मीटर जबकि बूढ़ी गंडक चनपटिया में 0़84 मीटर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
उन्होंने हालांकि बताया कि वाल्मीकीनगर स्थित गंडक बराज में जलस्राव में कमी आई है। प्रसाद के मुताबिक आज वाल्मीकीनगर बैराज में गंडक का जलस्राव 200600 क्यूसेक है, जबकि बीरपुर बैराज में कोसी नदी का जलस्राव 174890 क्यूसेक तथा बराह क्षेत्र में कोसी का जलस्राव 130400 क्यूसेक है।
किशनगंज जिले के पांच प्रखंडों ठाकुरगंज, दिघलबैक, डाकपोखर, कोचाधामन तथा किशनगंज प्रखंड में कनकई और रतुआ नदी का पानी प्रवेश कर गया है। इससे करीब तीन लाख लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं।
किशनगंज के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) ललन जी ने शुक्रवार को बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में आज राष्ट्रीय आपदा सुदृढ़ीकरण बल (एनडीआरएफ) की टीम पहुंच गई है तथा राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में नाव की भी व्यवस्था कर दी गई है।
पूर्णिया जिले में भी रूपौली प्रखंड में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। मधुबनी जिले के मधवापुर प्रखंड में धौंस नदी का तटबंध टूटने के बाद कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है जबकि दर्जनों गांवों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है।
दरभंगा जिले में भी बाढ़ का तांडव जारी है। दरभंगा के घनश्यामपुर, बिरौल तथा केवटी प्रखंड के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। घनश्यामपुर में कमला नदी के सुरक्षा तटबंध के टूट जाने से कमला नदी के पश्चिमी तटबंध के कटाव का सिलसिला जारी है।
दरभंगा के जिलाधिकारी पान मोहन ठाकुर ने बताया कि जिले के सभी तटबंध सुरक्षित हैं जहां भी तटबंध कमजोर हैं वहां जल संसाधन विभाग के अधिकारियों द्वारा निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने दावा कि कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं।
ग्रामीणों ने हालांकि आरोप लगाया है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी प्रकार की सहायता प्रशासन द्वारा उपलब्ध नहीं करायी जा रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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