जसवंत पर कार्रवाई कष्टदायक लेकिन जरूरी: आडवाणी
पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "चिंतन बैठक में आडवाणीजी ने कहा कि जसवंतजी को निष्कासित किए जाने का फैसला दु:खद था। वह 30 साल पार्टी के साथ रहे लेकिन कार्रवाई जरूरी थी।"
जसवंत द्वारा उठाए गए इस सवाल पर भी आडवाणी ने सफाई दी कि सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध लगाया था। बकौल सुषमा आडवाणी ने कहा, "सरदार पटेल ने तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कहने पर आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया जरूर था लेकिन एक महीने के अंदर ही उन्होंने नेहरू को पत्र लिखकर कहा था कि आरएसएस दोषी नहीं है।"
सुषमा के मुताबिक आडवाणी ने कहा कि देश की राजनीति में कांग्रेस का एकाधिपत्य खत्म करने के लिए गठबंधन की राजनीति आवश्यक है। आडवाणी ने कहा,"वर्ष 1999 से 2009 के बीच भाजपा को दो लोकसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। यह आत्ममंथन का विषय है लेकिन निराशा का कोई कारण नहीं है। लोकसभा में हम आज भी प्रमुख विपक्षी पार्टी हैं और आठ राज्यों में हमारी सरकारें हैं। हाल के दिनों में हमारी झगड़ों की छवि बनी है। संवाद से हमें इन समस्याओं का हल निकालना चाहिए। संवाद ही हमारी ताकत है जो अन्य दलों में नहीं दिखता। कांग्रेस में सोनिया गांधी, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में मायावती, समाजवादी पार्टी (सपा) में मुलायम सिंह यादव और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में लालू प्रसाद का हुक्म चलता है।"
आडवाणी ने शीर्ष पदों पर बैठे पार्टी के नेताओं से अपील की कि वे अपने आचरण से आदर्श स्थापित करें जिससे जनता में उम्मीद जगे कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास जगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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