हिंद महासागर में चीन को रोकने के लिए भारत की निगाह मालदीव पर (लीड-1)
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार तटीय सुरक्षा और उन इलाकों में गश्त के सिलसिले में मालदीव भारत के साथ रक्षा सहयोग चाहता है।
मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि माले पहुंचते ही एंटनी मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद से मुलाकात करेंगे।
अधिकारी के अनुसार एंटनी मालदीव के वरिष्ठ नेताओं और राष्ट्रीय सुरक्षा बल के अधिकारियों से वार्ता करेंगे। वह दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए मालदीव के रक्षा मंत्री अमीन फैजल के साथ चर्चा करेंगे।
एंटनी के साथ एक उच्च स्तरीय दल भी गया है, जिसमें रक्षा सचिव प्रदीप कुमार, सशस्त्र बल के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एन.के.परमार, तटरक्षक बल के महानिदेशक वाइस एडमिरल अनिल चोपड़ा और नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल डी.के. जोशी शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि मालदीव के तटीय सुरक्षा नेटवर्क को भारत के तटीय राडार नेटवर्क से जोड़ने का प्रस्ताव है। एंटनी अपने दौरे में मालदीव को भारतीय तटरक्षक हेलीकाप्टर सौंप सकते हैं।
एंटनी भारत-मालदीव मैत्री कार्यक्रम के समापन सत्र में शामिल होंगे। इसके अलावा वह 'इंदिरा गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल' का भी दौरा करेंगे।
तीन प्रमुख कारण हैं जिनके कारण भारतीय सुरक्षा के लिहाज से मालदीव का महत्व है।
पहला, लक्षद्वीप समूह से निकटता के कारण 26/11 के मुंबई हमले के बाद से मालदीव की तटीय सुरक्षा की ओर भारत का ध्यान आकर्षित हुआ है।
दूसरा, 1,100 से अधिक द्वीपों वाले देश से भारतीय नौसेना को साजोसामान की सहायता या फिर एक नौसैनिक अड्डा संचालित करने की सुविधा मिल सकती है।
तीसरा, मालदीव से मिली सहायता से भारत की समुद्री हवाई निगरानी क्षमता में वृद्धि हो सकती है।
चीन इन क्षेत्रों में लगातार अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें कर रहा है, ऐसे में अफ्रीका से आस्ट्रेलिया तक फैला हिंद महासागर भारत के लिए रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हो गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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