'मुझे हनुमान से रावण बना दिया'

किताब के लिए निकाला
पार्टी से निकाले जाने पर आहत जसवंत सिंह ने बुधवार को कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि सिर्फ एक किताब लिखने की वजह से उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। जसवंत सिंह ने कहा कि 'मुझे पार्टी से निकाले जाने की सूचना फोन पर दी गई, अगर मुझे निजी तौर पर दिल्ली में ही यह बात बता दी गई होती, तो बेहतर रहता।'
उन्हें इस बात का भी दुख है कि पार्टी ने इस बावत उन्हें कोई नोटिस तक नहीं दिया। उन्होंने एक पुरानी बात को याद करते हुए कहा कि, "राजस्थान में पार्टी का एक पोस्टर छपा था, जिसमें मुझे हनुमान के रूप में दिखाया गया था। अब एक झटके में पार्टी ने मुझे हनुमान से रावण बना दिया"।
राजनीतिक जीवन समाप्त नहीं
सिंह ने स्पष्ट कहा, "मेरा राजनीतिक जीवन अभी समाप्त नहीं हुआ है।" उन्होंने कहा कि वह पार्टी की लोकसभा चुनावों में हुई हार के संबंध में उनके द्वारा तैयार किए दस्तावेज को दिल्ली वापिस पह़ुंचने पर मीडिया को उपलब्ध करवाएंगे। सिंह ने कहा इस दस्तावेज में कुछ सवाल उठाए गए हैं और उन्हें पार्टी नेतृत्व ने आश्वस्त किया था कि इन पर चिंतन बैठक में चर्चा होगी।
अलग गोरखालैंड के लिए वरदान
वहीं अलग गोरखा राज्य के लिए संघर्ष कर रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने जसवंत सिंह के पार्टी से निकाले जाने की घटना को जेजेएम के लिए वरदान बताया है।
जीजेएम की केंद्रीय समिति के सदस्य हरका बहादुर छेत्री ने कहा, "जसवंत सिंह अब पार्टी की बेड़ियों से स्वतंत्र हो गए हैं। उन्हें भाजपा से निकाला जाना गोरखालैंड आंदोलन के लिए वरदान साबित होगा। अब वह स्वतंत्र होकर हमारे आंदोलन को और भी मुखर बनाएंगे।"
संघ का दबाव
सूत्रों के मुताबिक, संघ परिवार और पार्टी के कई हलकों ने जसवंत सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का दबाव बनाया था। इसी का नतीजा है कि जसवंत सिंह को पार्टी ने निष्कासित कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि जसवंत सिंह ने अपनी पुस्तक 'जिन्ना-इंडिया, पार्टिशन, इंडीपेंडेंस' में मोहम्मद अली जिन्ना को सेक्यूलर बताते हुए जवाहरलाल नेहरु और सरदार पटेल को देश के विभाजन का जिम्मेदार ठहराया है।


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