दु:ख है किताब लिखने के कारण पार्टी से निकाला गया : जसवंत
शिमला में पत्रकारों से चर्चा में जसवंत ने कहा, "चिंता और दु:ख है कि मात्र एक किताब लिखने के लिए पार्टी से मुझे निकाल दिया गया। मेरा मानना है कि राजनीति में या राजनीतिक दलों में जिस दिन सोच-विचार, चिंतन-मनन, लेखन-पठन बंद हो जाएगा..उस दिन हम लोग एक अंधकारपूर्ण गली में प्रवेश कर जाएंगे ।"
पार्टी के फैसले से आहत जसवंत ने कहा, "मैं पार्टी के शुरूआती सदस्यों में से एक हूं। मैं आभारी हूं कि 30 वर्षो के अपने राजनीतिक जीवन के दौरान वक्त-बेवक्त काम करने के लिए मुझे कई जिम्मेदारियां सौंपी गई और यथाशक्ति मैंने उन्हें निभाने की कोशिश की। लेकिन दु:ख होता है कि 30 सालों का मेरा संबंध इस प्रकार से समाप्त हुआ।"
उन्होंने कहा, "पार्टी को यही निर्णय लेना था तो अध्यक्षजी ने मुझे दिल्ली में ही बता दिया होता कि शिमला मत आओ। मेरी किताब में कांग्रेस मीन-मेख निकाले तो बात समझ में आती है लेकिन भाजपा करे यह समझ से परे हैं।" सिंह ने कहा, "बेहतर होता अगर मुझे पार्टी से निकाले जाने के निर्णय के बारे में ऊोन पर नहीं बल्कि व्यक्तिगत रूप से सूचित किया जाता।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पार्टी की लोकसभा चुनावों में हुई हार के संबंध में उनके द्वारा तैयार किए दस्तावेज को दिल्ली वापिस पह़ुंचने पर मीडिया को उपलब्ध करवाएंगे। सिंह ने कहा इस दस्तावेज में कुछ सवाल उठाए गए हैं और उन्हें पार्टी नेतृत्व ने आश्वस्त किया था कि इन पर चिंतन बैठक में चर्चा होगी। सिंह ने स्पष्ट कहा, "मेरा राजनीतिक जीवन अभी समाप्त नहीं हुआ है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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