पुलिस सुधारों को तत्काल आवश्यकता : विशेषज्ञ
नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। पूर्व पुलिस प्रमुखों और विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस को राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों के चंगुल से मुक्त करने और उसे अधिक प्रभावी तथा आम आदमी के लिए भरोसेमंद बनाने के लिए देश में तत्काल पुलिस सुधारों की आवश्यकता है।
पुलिस से अपना नियंत्रण समाप्त होने के भय से अधिकांश राज्य पुलिस सुधारों को आगे बढ़ाने में हिचकिचा रहे हैं।
सुधारों का अर्थ औपनिवेशिक काल के पुराने पुलिस कानून,1861 के प्रावधानों को खत्म करना है। पुलिस में कार्य कर चुके अधिकांश वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यदि देश की सुरक्षा करनी है तो यह आवश्यक है।
पुलिस की कार्यप्रणाली से कमियों को दूर करने के लिए वर्ष 1996 में सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह कहा,"भारतीय पुलिस की प्रमुख समस्या राजनीतिक और नौकरशाही ढांचा है।"
सिह ने आईएएनएस से कहा कि राजनीतिज्ञ और नौकरशाह पुलिस बल पर अपनी मजबूत पकड़ को छोड़ना नहीं चाहते जिसका "उपयोग कम और दुरुपयोग अधिक होता है।"
उन्होंने कहा कि पुलिस को इन बंधनों से मुक्त होना चाहिए। इसमें बाधाएं आना स्वाभाविक है क्योंकि यह "जमींदारी व्यवस्था के उन्मूलन के समान है और जमींदारों से जमीन छीनने की तरह है।"
उल्लेखनीय है कि गृहमंत्री पी.चिदंबरम ने सोमवार को आंतरिक सुरक्षा बैठक में सोमवार को कहा था कि राज्य सरकारें सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार पुलिस सुधारों को लागू करने में विफल रहीं हैं।
पूर्व पुलिस महानिदेशकों प्रकाश सिंह और एन.के. सिंह की पुलिस की कार्य प्रणाली में कमियों को दूर करने संबंधी जनहित याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्देश दिया था।
गैर सरकारी संस्था कामनवेल्थ ह्यूमन राइट इनिशिएटिव (सीएचआरआई) की माया दारूवाला के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय और केंद्र सरकार के कड़े रुख के बावजूद 28 राज्यों ने पुलिस सुधारों और अन्य निर्देशों को पूरा करने से इंकार कर दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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