भाजपा नेताओं पर भड़के बाल ठाकरे

Bal Thackeray
मुंबई। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्‍ठ नेता जसवंत सिंह की किताब 'जिन्ना इंडिया पार्टीशन इंडिपेंडेंस' में मोहम्‍मद अली जिन्‍ना की तारीफ शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे को रास नहीं आयी। सिर्फ ठाकरे ही नहीं बल्कि भाजपा और संघ के नेता भी जसवंत से खासे नाराज हैं।

पूरी भाजपा को लपेटा

शिवसेना प्रमुख ने पार्टी के मुखपत्र सामना में संपादकीय लिखा है, जिसमें भाजपा को जमकर खरी खोटी सुनाई है। ठाकरे ने लिखा है कि भाजपा नेता ना जाने क्यों जिन्ना के मुद्दे पर बार-बार फिसल जाते हैं। जिन्ना को श्रद्धा सुमन चढ़ाने के लिए भाजपा नेताओं में होड़ लगी हुई है। पहले आडवाणी और अब जसवंत सिंह जिन्‍ना को पूज रहे हैं।

ठाकरे ने लिखा है कि लाल कृष्‍ण आडवाणी ने कुछ साल पहले पाकिस्तान की यात्रा के दौरान जिन्ना को सच्चा धर्मनिपेर्क्ष करार दिया था। अब जसवंत सिंह भी वैसा ही कुछ अलाप रहे हैं। जसवंत सिंह ने तो यहां तक कह डाला कि भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के जिम्‍मेदार जवाहर लाल नेहरू थे। ठाकरे का मानना है कि ये सब किताब की पब्लिसिटी के लिए कहा गया है। ठाकरे ने लिखा है कि भारत में मुसलमानों को बराबरी का अधिकार मिला है। राजनीति से लेकर न्याय व्यवस्था तक हर जगह मुसलमान काबिज हैं। इन सबके बावजूद आखिर जसवंत क्‍यों मुसलमानों की दशा का रोना रो रहे हैं।

सुषमा स्‍वराज का विरोध

जसवंत सिंह की किताब पर भाजपा नेता सुषमा स्‍वराज ने भी जमकर जसवंत के खिलाफ बोला। सुषमा ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि जिन्‍ना को पूजना और बंटवारे के लिए सरदार वल्‍लभभाई पटेल को जिम्‍मेदार ठहराना भाजपा की विचारधारा के खिलाफ है। इसके अलावा राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ के नेता राम माधव ने मीडिया से कहा, "मैंने किताब का सार पढ़ा है। यह कहना कि जिन्‍ना बंटवारे के लिए जिम्‍मेदार नहीं थे, बिलकुल सच नहीं है।

मौन रहे जसवंत

जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष बताकर और उनकी तारीफों के पुल बांधकर विवाद खड़ा करने वाले जसवंत सिंह खुद एकदम मौन हैं। यहां तक अपनी पुस्तक के विमोचन समारोह में भी वो कुछ नहीं बोले। विमोचन अवसर पर सात वक्ताओं ने उनकी पुस्तक की तारीफ की लेकिन जसवंत सिंह ने सिर्फ इतना ही कहा, "लेखकों को बोलना नहीं चाहिए। वे पढ़ा करते हैं। यह पुस्तक बाहर उपलब्ध है। कृपा कर इसे खरीदें और पढ़ें। शुभ रात्रि।"

यही नहीं कार्यक्रम में मौजूद रहे भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने सभी वक्ताओं की बातों को ध्यान से सुना लेकिन जसंवत की तरह वो भी कुछ नहीं बोले। इससे साफ है कि अंदर ही अंदर भाजपा के नेता जसवंत की किताब से खुश नहीं हैं, क्‍योंकि इससे पार्टी की छवि एक बार फिर खतरे में पड़ सकती है।

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