'दूसरे राज्य में नहीं मिलेगा आरक्षण'

सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने सोमवार को कहा है कि अपना मूल राज्य छोड़कर किसी अन्य राज्य में जा बसे लोग अपनी जाति के आधार पर संबंधित राज्य में आरक्षण का लाभ पाने का दावा नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा, "जिस राज्य में वे बस गए हैं, वहां अगर उनकी जाति या जनजाति को आरक्षित समुदाय में नहीं रखा गया है तो उन्हें यह सुविधा नहीं मिल सकती"। हालांकि इस आदेश का असर केंद्रीय शैक्षिक संस्थानों और केंद्र सरकार की नौकरियों पर नहीं पड़ेगा।
कोर्ट के अनुसार अनुसूचित जाति या जनजाति का प्रवासी दूसरे राज्य में (ओबीसी) यानी अन्य पिछड़ी जाति के कोटे में आरक्षण पाने का दावा भी नहीं कर सकता। न्यायमूर्ति एस.बी. सिन्हा और सी. जोसेफ की खंडपीठ ने कहा कि "हो सकता है कि किसी खास जाति या जनजाति के व्यक्ति को इससे नुकसान उठाना पड़े लेकिन इस वजह से दूसरों को ऐसा नुकसान नहीं उठाने दिया जाएगा"।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि "संविधान के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक इकाई मानकर ऐसे व्यक्तियों की सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन की पहचान करने की जरूरत है। यही सिद्धांत अल्पसंख्यकों के मामलों में भी लागू होता है"।
खंडपीठ का ये आदेश दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फ़ैसले पर आया है जिसमें उच्च न्यायालय ने दूसरे राज्यों के पिछड़ी जाति के प्रत्याशियों को दिल्ली में आरक्षण का लाभ पाने की अनुमति दे दी थी।


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