हिमाचलः रैगिंग करने पर होगी जेल

Raging
शिमला। प्रदेश में रैगिंग के बढ़ते मामलों को देखते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने रैगिंग के खिलाफ एक सख्‍त कानून बनाया है। जिसके तहत रैगिंग करने वाले या उसमें शामिल व्यक्ति को तीन वर्ष तक की जेल या 50 हजार रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकता है। इतना ही नहीं किसी संस्थान में एक से ज्यादा बार रैगिंग की शिकायत मिलती है तो उस शैक्षिक संस्थान के प्रमुख को भी जेल हो सकती है।

राज्य विधानसभा में सोमवार को हिमाचल प्रदेश शैक्षणिक संस्था (रैगिंग निरोधक) विधेयक, 2009 को ध्वनि मत से पारित किया गया। पांच महीने पहले रैगिंग के कारण मेडिकल कालेज के एक छात्र की मौत हो गई थी। विधेयक में रैगिंग करने वाले के लिए तीन वर्ष तक की जेल या 50 हजार रुपये का जुर्माना या दोनों का विधेयक है।

इसमें शैक्षणिक संस्थान के प्रमुख या अनुशासन के लिए जिम्मेदार अधिकारी को दो वर्ष तक की जेल की सजा और 25 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। अधिनियम के तहत ऐसा अपराध गैर जमानती और संज्ञेय है।

इतना ही नहीं इस अधिनियम के तहत सजा पाए छात्र को संस्थान से निकाल दिया जाएगा और निष्कासन के आदेश के बाद उसे तीन साल तक किसी दूसरे शैक्षिक संस्थान में दाखिला नहीं मिलेगा।

यह विधेयक 25 मार्च 2009 से लागू होगा जो कांगड़ा जिले के तंडा में गत आठ मार्च को डा. राजेंद्र प्रसाद गवर्नमेंट मेडिकल कालेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र अमन काचरू की दुखद मौत के बाद जारी रैगिंग निरोधी अध्यादेश की जगह लेगा।

इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश पांचवां राज्य बन गया है जहां रैगिंग के खिलाफ कानून लागू किया गया है। इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल भी यह कानून पारित हो चुका है।

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