प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर राज्यों से मांगा सहयोग (लीड-1)

नई दिल्ली, 18 अगस्त (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि देश में बहुआयामी पर्यावरणीय चुनौतियों से हालात चिंताजनक बन गए हैं। उन्होंने राज्य सरकारों से प्रदूषण पर काबू पाने, नदियों की सफाई और जलवायु परिवर्तन से निपटने में सहयोग देने को कहा।

राज्यों के पर्यावरण मंत्रियों के दिन भर चले सम्मेलन का मंगलवार को उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "जलवायु परिवर्तन हमारी पारिस्थितिकी प्रणाली के लिए चुनौती बन गया है, पानी की किल्लत जीवन का हिस्सा बन चुकी है और प्रदूषण हमारी सेहत के लिए खतरनाक है।"

उन्होंने कहा कि अपनी जीवन शैली के बारे में हमें बुनियादी फैसला करना होगा। उन्होंने श्रोताओं को भरोसा दिलाया कि इन चुनौतियों से निपटना असंभव नहीं है।

जलवायु परिवर्तन को 'प्रमुख वैश्विक चुनौती' करार देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को वर्तमान और भावी पीढ़ी के प्रति अपनी जिम्मेदारी का अहसास है और वह अपने विकास के रास्ते में पारिस्थितिकीय निरंतरता सुनिश्चित करेगा।

मनमोहन सिंह ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए केंद्र द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत आठ मिशनों के क्रियान्वयन के लिए सभी राज्य सरकारों से सहयोग देने को कहा। उन्होंने सभी राज्यों के मंत्रियों से कहा कि वे इस राष्ट्रीय योजना के मुताबिक राज्य स्तरीय कार्ययोजनाएं तैयार करें।

प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों से अपने वनविभागों का आधुनिकीकरण करने और रिक्त पदों पर भर्तियां करने को कहा। उन्होंने कहा कि बहुत से राज्यों को अब क्षतिपूरक वनरोपण के लिए बड़ा अनुदान मिलेगा, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में इसके लिए 9000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि से प्रतिबंध हटाया है। यह धनराशि सात साल से ज्यादा अर्से से निलंब लेखा में रखी थी।

प्रधानमंत्री ने पर्यावरण मंजूरी को लाईसेंस राज का एक नया रूप तथा भ्रष्टाचार का नया स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रियाएं निष्पक्ष, पारदर्शी और सहज होनी चाहिए और इस मामले में कोई निर्णय एक समय सीमा के भीतर ले लिया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए पर्यावरण एवं वन राज्य मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि इस धनराशि में से मंगलवार सुबह 4000 करोड़ रुपये की पहली किश्त 10 राज्यों को जारी की जा चुकी है और 1000 करोड़ रुपये की राशि अगले कुछ दिनों में स्थानांतरित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जनजातीय अधिकार अधिनियम इन अधिकारों की गारंटी का सबसे उत्कृष्ट माध्यम है।

प्रधानमंत्री ने देश भर की नदियों के जल के दूषित होने पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस साल के राष्ट्रीय बजट में स्वच्छ नदियों के लिए प्रावधान में वृद्धि की गई है। उन्होंने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से नदियों में गिरने वाले औद्योगिक कचरे पर रोक लगाने को कहा। नदियों में 25 प्रतिशत प्रदूषण इसी वजह से होता है।

उन्होंने कहा, "देश की ऊर्जा जरूरतों में तेजी से वृद्धि हुई है और इन्हें हमें पर्यावरण के अनुकूल तरीके अपनाकर पूरा करना होगा।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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