अफगानिस्तान में चुनाव पूर्व हिंसा, करजई के निवास पर हमला (राउंडअप)

देश में हिंसा और तालिबान की धमकियों के बीच कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति चुनाव कराए जा रहे हैं। चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति हामिद करजई के मुकाबले 30 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें दो पूर्व मंत्री भी शामिल हैं। करजई को मुख्य चुनौती पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला अब्दुल्ला से मिल रही है।

तालिबानी आतंकवादियों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर रखा है। उन्होंने लोगों से चुनाव में भाग लेने पर मौत का सामना करने को तैयार रहने की चेतावनी दी है।

काबुल में राष्ट्रपति हामिद करजई के आवास के समीप आज सुबह दो रॉकेट दागे गए। यह रॉकेट काबुल केदक्षिणी हिस्से बगरामी से दागे गए थे। अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया, "दोनों रॉकेट राष्ट्रपति आवास के समीप आकर गिरे लेकिन खुशकिस्मती से कोई हताहत नहीं हुआ।" राष्ट्रपति भवन के एक सूत्र ने बताया कि उनमें से एक रॉकेट परिसर के भीतर एक पेड़ से जा टकराया।

काबुल में ही आज के दिन अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा बलों के काफिले को निशाना बनाकर किए गए एक आत्मघाती विस्फोट में छह लोग मारे गए और 44 घायल हो गए। जबकि एक अन्य आत्मघाती हमलावर ने दक्षिणी उरूजगान प्रांत में विस्फोट किया। इस हमले में पांच लोग मारे गए।

घटनास्थल पर मौजूद अधिकारी अब्दुल मनान ने बताया कि काबुल में जलालाबाद रोड पर एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से लदे वाहन से विदेशी सुरक्षा बलों के काफिले को टक्कर मार दी।

अफगान सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता फरीद राहिद ने बताया, "छह शवों और 44 घायलों को काबुल के तीन अस्पतालों में लाया गया है।"

उन्होंने बताया कि हताहत होने वालों में अधिकांश नागरिक हैं। घायलों में संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने वाले तीन अफगान नागरिक भी हैं।

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जनरल जहीर आजमी ने बताया कि तीन शव और 21 घायलों को मौके से हटाया गया है तथा अफगान और ब्रिटिश सुरक्षा बलों ने घटनास्थल को घेर लिया है।

नाटो के एक सूत्र ने डीपीए को बताया कि हमले वाली जगह ब्रिटिश सेना का एक वाहन मौजूद था।

मंगलवार को ही उरूजगान सूबे के चौरा जिले में एक नाके पर हुए हमले में तीन अफगान सुरक्षाकर्मी और दो नागरिक मारे गए। सूबे की राजधानी से करीब 30 किलोमीटर दूर एक अन्य धमाके में तीन सैनिक और तीन नागरिक घायल हो गए।

उधर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अफगानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले कहा है कि वहां आतंकवाद के खिलाफ जंग आसान नहीं है और यह लंबे समय तक चल सकती है।

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार ओबामा ने सोमवार को एरिजोना में कहा कि अफगानिस्तान में संघर्ष एक आवश्यकता थी और इसका कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा कि अफानिस्तान की सुरक्षा के लिए अमेरिका प्रतिबद्ध है।

ओबामा ने कहा, "अफगानिस्तान में हमें आगे और कठिन चुनौती मिलेगी। वहां जीत का कोई आसान रास्ता नहीं है और न ही ये जल्दी संभव है।"

इस बीच, उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) ने कहा है कि अफगानिस्तान में दो दिन बाद होने वाले राष्ट्रपति चुनावों के दौरान सैन्य अभियान नहीं चलाए जाएंगे।

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार नाटो की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "चुनावों के दौरान सुरक्षा प्रबंध करने वाले अफगान राष्ट्रीय सुरक्षा बलों के समर्थन में सिर्फ वही अभियान चलाए जाएंगे जो उस दिन जनता की हिफाजत के लिए बेहद जरूरी होंगे।"

नाटो का यह बयान अफगान रक्षा मंत्री अब्दुल रहीम वरदाक की ओर से किए गए इसी तरह के अनुरोध के बाद आया है। उन्होंने रविवार को कहा था अफगान सुरक्षा बल अपने सारे अभियान रोक देंगे। उन्होंने तालिबानियों से भी कहा था कि वे लोगों को वोट देने के लिए घरों से बाहर निकलने दें।

चुनाव के मद्देनजर देश भर में 6500 से ज्यादा मतदान केंद्र बनाए गए हैं। उनकी हिफाजत के लिए करीब 200,000 अफगान सुरक्षाकर्मी, 100,000 से ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय सैनिक सुरक्षा का बंदोबस्त देखेंगे। अफगान सुरक्षा अधिकारियों ने हालांकि कबूल किया है कि देश के आकार को देखते हुए सब जगह तैनाती मुश्किल होगी।

प्रचार के अंतिम दिन विभिन्न उम्मीदवारों ने मतदाताओं का विश्वास हासिल करने की जोरदार कोशिश की। गुरुवार को लगभग 1.7 करोड़ मतदाता राष्ट्रपति चुनने के लिए मतदान करेंगे। साथ ही वे 420 काउंसलर के लिए भी मतदान करेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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