राष्ट्रपति ने किया मुंबई की झुग्गियों के उद्धार का आह्वान
मुंबई मेट्रो रेल के दूसरे चरण का उद्घाटन करते हुए पाटिल ने यहां कहा कि देश की आर्थिक राजधानी के विभिन्न हिस्सों में झुग्गियों के ठीक बगल में खड़ी बहु मंजिली इमारतें एक पीड़ादायक तस्वीर पेश करती हैं।
पाटिल ने अपनी मातृ भाषा मराठी में कहा, "यह स्थिति हममें में से किसी के लिए भी गर्व की बात नहीं हो सकती और यह परिदृश्य हर हाल में बदली जानी चाहिए।"
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि झुग्गियों के उद्धार से जुड़े कार्यक्रमों के लिए सिर्फ वित्तीय संसाधनों की ही समस्या नहीं है, इस रास्ते में सामाजिक, राजनीतिक और आपराधिक कारण भी भूमिका निभाते हैं।
राष्ट्रपति पाटिल ने कहा, "मैं महसूस करती हूं कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर केंद्र, राज्य और नगर निगम के अलावा सामाजिक संगठनों, औद्योगिक घरानों, अभियंताओं, बिल्डरों, मीडिया और जनता को एक साथ मिल कर मानवता के इस कलंक को मिटाने के लिए काम करना चाहिए।"
विभिन्न राजनीतिक पार्टियों से अपने मतभेदों को भुला कर इस मुद्दे के समाधान के लिए काम करने का आह्वान करते हुए पाटिल ने कहा कि यह एक पुण्य का काम होगा और मुंबई को एक सच्चा मानवीय चेहरा प्राप्त हो जाएगा।
झुग्गियों में रहने वाले 40,000 परिवारों के पुनर्वास के लिए किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए पाटिल ने कहा कि जल आपूर्ति, साफ सफाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और बिजली जैसी शहरीकरण की जरूरतें भी सभी को मुहैया कराई जानी चाहिए।
इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल एस.सी. जमीर, मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण और केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एस.जयपाल रेड्डी भी उपस्थित थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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