कश्मीर में राजमिस्त्री के पुत्रों ने लोक सेवा की पहली बाधा पार की
गंदरबल (जम्मू एवं कश्मीर), 18 अगस्त (आईएएनएस)। आतंकवाद के दौर में अपने भाई को गंवाने के दुस्वप्न से उबरते हुए एक राजमिस्त्री ने अपने तीन बच्चों की शिक्षा का बेहतर प्रबंध किया और अब उसके दो पुत्रों ने राज्य सिविल सेवा परीक्षा की पहली बाधा पार कर ली है।
कई वर्षो तक अकुशल मजदूर के तौर पर काम करने के बाद राजमिस्त्री बने गंदरबल जिले के मणिगाम गांव के अब्दुल खालिक (52 वर्ष) को बहुत ही कम औपचारिक शिक्षा मिली है।
खालिक ने आईएएनएस को बताया कि इस महीने अल्लाह के फजल से उनके दो पुत्रों ने राज्य सिविल सेवा परीक्षा का प्राथमिक चरण पास कर लिया और अब वे मुख्य परीक्षा की तैयारियां कर रहे हैं। उनकी पुत्री 12 वीं कक्षा की छात्रा है।
घाटी में जब 90 के दशक में आतंकवाद चरम पर था तो खालिक का एक भाई आतंकवादी बन गया और सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया। परंतु अब अधिकांश ग्रामीण राष्ट्र की मुख्यधारा के साथ जुड़ना चाहते हैं और अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा की उपलब्धता सुनिश्चित करना चाहते हैं।
राज्य सेवा आयोग के एक सदस्य खाजिर मुहम्मद वानी ने बताया कि 60,000 से अधिक उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा में शामिल हुए थे और करीब 11,600 पहली बाधा पार करने में सफल रहे।
उन्होंने कहा कि 11,600 उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार से गुजरना होगा, इसमें सफल लोगों से 395 रिक्त पदों को भरा जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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