देश में भंडारण क्षमता में 1 करोड़ टन का अभाव : एसोचैम

एसोसिएटेड चैंबर ऑफ कामर्स (एसोचैम) और ग्लोबल कंसल्टेंसी, केपीएमजी द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भंडारण क्षमता को बढ़ाने के लिए देश में शीत गृह की नई अधोसंरचनाएं खड़ी करनी होंगी।

एसोचैम के अध्यक्ष सज्जन जिंदल ने कहा है, "शीत गृह के कमजोर ढांचे के कारण 30 प्रतिशत से अधिक उत्पाद नष्ट हो जाते हैं। देश में फिलहाल 2.17 करोड़ टन भंडारण की क्षमता है। इस क्षमता में एक करोड़ टन की बढ़ोतरी करने की आवश्यकता है।"

'फूड प्रासेसिंग एंड एग्री बिजनेस' नामक इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में खासतौर से बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर कृषि उत्पादों के निर्यात संबंधी अधोसंरचना पर्याप्त नहीं है।

शीत गृह सुविधाएं फिलहाल आलू, संतरा, सेब, अंगूर, अनार और फूलों के लिए ही ज्यादातर उपलब्ध हैं। जिनका भी ठीक से इस्तेमाल नहीं हो पाता।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अन्य खास उत्पादों के लिए और कृषि उत्पादों के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी के तहत भंडारण सुविधाएं स्थापित की जानी चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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