पाकिस्तान में रची जा रही है आतंकी हमले की साजिश : प्रधानमंत्री (लीड-2)
आंतरिक सुरक्षा के मसले पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, "सीमापार आतंकवाद आज भी प्रमुख चुनौती बना हुआ है। पिछले साल नवंबर में मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों के बाद हमने कई अतिरिक्त उपाय किए हैं। लेकिन इस मामले में लगातार चौकस रहने की जरूरत है।"
उन्होंने कहा, "इस बात की विश्वसनीय जानकारी है कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी नए हमलों की साजिश रच रहे हैं। इन आतंकवादियों की गतिविधियों का दायरा आज जम्मू एवं कश्मीर से बढ़कर देश के सभी हिस्सों में फैल गया है।"
सुरक्षा चाक चौबंद करेंगे :
केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से समन्वित प्रतिक्रिया का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि खुफिया प्रणालियों को चाक-चौबंद करने और आतंकवादी हमलों का तत्काल जवाब देने के लिए काफी कुछ किया जाना बाकी है।
उन्होंने कहा, "मजबूत तटीय सुरक्षा योजना लागू की जा रही है लेकिन काफी कुछ किया जाना अभी बाकी है और हम उपयुक्त कदम उठाएंगे।" उन्होंने कहा कि लड़ाई के विभिन्न तरीकों और आतंकवाद तथा नक्सलियों की ओर से पेश की जा रही चुनौतियों से सिर्फ नए विचारों और ज्यादा दृढ़ कदमों से ही निपटा जा सकता है। अगर हमें कामयाब होना है तो हमें सबसे आगे रहना होगा।
घुसपैठ की घटनाएं परेशान करने वाली :
पिछले कुछ वर्षो से हिंसक घटनाओं में आ रही कमी की बदौलत जम्मू एवं कश्मीर में सुरक्षा स्थितियों में सुधार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कुछ 'परेशान करने वाली बातों' की ओर भी इशारा किया।
उन्होंने कहा कि कुछ घटनाएं परेशानी में डालने वाली हैं। कम हो चुकी घुसपैठ की घटनाओं में इस साल फिर से वृद्धि देखी जा रही है। घुसपैठ के प्रयासों में भी इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि घुसपैठिए पहले से ज्यादा तैयार तथा बेहतर उपकरणों और संचार के अत्याधुनिक उपकरणों से लैस हैं।
नक्सली समस्या के लिए संतुलित रणनीति की जरूरत :
नक्सली हिंसा के बारे में मनमोहन सिंह ने कहा कि इन संगठनों की ओर से ज्यादा आक्रामक कार्रवाई के संकेत हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में नक्सली संगठनों ने सुरक्षा बलों को काफी नुकसान पहुंचाया है। ऐसे संकेत भी हैं कि वे और जबरदस्त कार्रवाई करने की फिराक में हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, "वामपंथी उग्रवाद की समस्या सचमुच काफी जटिल है। इनसे निपटने के लिए संतुलित और अलग तरह की रणनीति की जरूरत है। राज्य सरकारों को अपनी जिम्मेदारियां और दायित्व निभाने हैं और नक्सली बहुल इलाकों में कानून का शासन स्थापित करना है।"
पूर्वोत्तर में हालात में सुधार :
पूर्वोत्तर का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वहां के हालात में वैसे तो सुधार हुआ है लेकिन असम, मणिपुर और नागालैंड जैसे कुछ राज्यों में स्थितियां चिंताजनक हैं।
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर की ज्यादातर हिंसक घटनाएं असम और मणिपुर में होती हैं। इनमें से करीब 30 प्रतिशत तो मणिपुर में ही होती हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में सांप्रदायिक स्थिति कमोबेश सामान्य है। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों को सांप्रदायिक शांति बनाए रखने के लिए विशेष तौर पर चौकस रहने की जरूरत है। खासतौर पर कर्नाटक को जहां इस साल कई सांप्रदायिक घटनाएं हुईं।"
पुलिस में खाली पद भरे जाएं :
दूसरी तरफ केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदंबरम ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से पुलिस बल की क्षमता को बढ़ाने की सलाह देने के साथ कहा कि उनकी सबसे पहली जिम्मेदारी पुलिस में खाली पड़े पदों को भरने की है।
चिदंबरम ने मुख्यमंत्रियों के इस सम्मेलन में कहा कि जनवरी 2008 तक पुलिस में सभी श्रेणियों के 230,567 पद खाली थे। इनमें से 150,000 भर्तियां तुरंत की जानीं चाहिए। राज्य सरकारों को अगले वर्ष 31 मार्च तक 150,000 पुलिसकर्मियों की भर्ती और उनका प्रशिक्षण आरंभ करने के लिए सभी प्रयास करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनवरी में इसी प्रकार के एक सम्मेलन के दौरान वितरित एक प्रश्नावली का केवल 12 राज्यों ने जवाब दिया है।
प्रश्नावली पुलिस की भर्ती, प्रशिक्षण, उपकरणों की खरीद, प्रौद्योगिकी अपनाने और कार्मिक प्रबंधन के लिए बजट के आवंटन से संबंधित थी।
पुलिस सुधारों पर ध्यान देना होगा :
पुलिस बल को मजबूत बनाने और खुफिया सूचनाओं में साझेदारी के लिए राज्यों द्वारा पर्याप्त प्रयास नहीं करने पर चिदंबरम ने असंतोष प्रकट किया।
चिदंबरम ने कहा, "हमने राज्य सरकारों में एक प्रश्नावली वितरित कर उनसे कई मदों और मुद्दों पर वर्तमान स्थिति की जानकारी देने का आग्रह किया था। मुझे खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि राज्यों की प्रतिक्रिया संतोषजनक नहीं थी।"
गृहमंत्री ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बावजूद पुलिस सुधारों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।
चिदंबरम ने कहा कि कई राज्य सरकारों ने अभी तक न तो पुलिस स्थापना बोर्डो को स्थापित किया है और न ही अन्य निर्देशों को पूरा किया है।
चिदंबरम ने कहा कि खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए मल्टी एजेंसी सेंटर (एमएसी) और राज्य स्तरीय एमएसी की स्थापना की प्रगति बहुत अच्छी है लेकिन इसमें और अधिक सुधार की संभावना है।
राज्य नए बल का गठन करें :
चिदंबरम ने राज्य सरकारों को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की तर्ज पर विशेष बलों के गठन का भी आग्रह किया।
तटीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन के सरकार के प्रयासों पर जोर देते हुए चिदंबरम ने तटीय पुलिस स्टेशनों, जांच चौकियों और सीमा चौकियों की स्थापना की धीमी गति पर असंतोष प्रकट किया।
उन्होंने कहा कि पुलिस की भर्ती, प्रशिक्षण, उपकरणों की खरीद, प्रौद्योगिकी को अपनाने और कार्मिक प्रबंधन के लिए बजट के आवंटन में भारी कमी है।
गृहमंत्री ने संभावित आतंकवादी हमलों के खतरे को समाप्त करने के लिए बेहतर खुफिया जानकारी और तैयारी की जरूरत पर बल दिया।
चिदंबरम ने कहा, "इन चुनौतियों का सामना करने और इन्हें परास्त करने के लिए हमारे पास एक औजार है और वह है पुलिस। अंतिम विश्लेषण के अनुसार पुरुष और महिला पुलिसकर्मी ही इस लड़ाई में हमारी जीत में सहयोग करेंगे।"
उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन से पुलिसकर्मियों को यह स्पष्ट संदेश जाना जाना चाहिए कि सरकार उन्हें हर स्तर पर हर प्रकार की- वित्तीय, सामग्री से और नैतिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए कर्तव्यबद्ध है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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