बुद्धा गार्डन बलात्कार मामले में राष्ट्रपति के 4 सुरक्षाकर्मी दोषी (लीड-1)
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस. के. सरवरिया ने सुरक्षाकर्मी हरप्रीत और सतेंद्र को दिल्ली विश्वविद्यालय की 17 वर्षीय छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार, अपहरण और लूटपाट का दोषी ठहराया।
अदालत ने सुरक्षाकर्मी कुलदीप और मनीष को इस अपराध में सहयोग करने का दोषी ठहराया। दोषियों को 22 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी।
भारतीय दंड संहिता की धारा 394 (लूटपाट), 366 (अपहरण) और 34 (एक समान उद्देश्य) के तहत चारों सुरक्षाकर्मियों को दोषी ठहराया गया। इसके अलावा हरप्रीत और सतेंद्र को सामूहिक बलात्कार की धारा 376(2)(जी) के तहत भी दोषी पाया गया।
युवती अपने दोस्त आशीष के साथ छह अक्टूबर 2003 को राष्ट्रपति भवन के समीप स्थित पार्क में गई थी, जहां उसके साथ हरप्रीत और सतेंद्र ने बलात्कार किया जबकि कुलदीप और मनीष ने उनकी निगरानी की।
अभियोजन पक्ष ने 25 गवाहों की गवाही के आधार पर बलात्कार की घटना को साबित किया। उसने कहा कि पीड़िता अपने दोस्त के साथ घूमने गई थी तभी सुरक्षाकर्मियों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया।
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि चारों सुरक्षाकर्मियों ने युवती को पहले उसके दोस्त से अलग किया और पार्क के अंदर ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया।
इस घटना को लेकर तत्कालीन राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने काफी नाराजगी जाहिर की थी। इस बारे में उनके तत्कालीन सचिव पी.एम. नायर ने अपनी पुस्तक 'द कलाम इफेक्ट' में लिखा है, "समान्य तौर पर कलाम काफी संयमित रहते हैं लेकिन उस दिन वह जितना नराज थे उतना मैंने उन्हें पहले कभी नहीं देखा था।"
बचाव पक्ष की ओर से हरप्रीत के वकील रणबीर सिंह ने अदालत के फैसले पर निराशा जाहिर करते हुए कहा, "दो दिन बाद मौके से बरामद साक्ष्यों जैसे रूमाल और एक गुड़िया को पीड़िता ने कभी स्वीकार नहीं किया और वे प्लांट किए गए थे।"
मनीष के वकील मनिंदर सिंह ने कहा, "वह सीधे तौर पर इस मामले में शामिल नहीं था और यह मामला पहचान परेड पर आधारित है, जहां पीड़िता ने मेरे मुवक्किल की पहचान नहीं की और इस कारण उस पर बलात्कार का मामला नहीं बना।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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