आतंकवाद को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक : चिदंबरम
नई दिल्ली, 17 अगस्त (आईएएनएस)। आतंकवाद,पूर्वोत्तर में अलगाववाद और नक्सलवादी हिंसा को देश के सामने उपस्थित सबसे बड़े खतरे बताते हुए केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदंबरम ने सोमवार को कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरों से मुक्त करने के लिए राज्य सरकारों को और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है।
आंतरिक सुरक्षा सम्मेलन में मुख्यमंत्रियों को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा,"हमारा सामूहिक रिकार्ड मिश्रित है। हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की हमारी प्रतिबद्धता, खुफिया सूचनाओं का आदान प्रदान,नए कानूनों और उपायों को सर्वसम्मत समर्थन है और जहां तक पुलिस सुधार की बात है उसकी लंबे समय से अनदेखी हो रही है।"
उन्होंने कहा कि पुलिस की भर्ती,प्रशिक्षण,उपकरणों की खरीद,प्रौद्योगिकी को अपनाने और कार्मिक प्रबंधन के लिए बजट के आवंटन में भारी कमी है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए राज्यों द्वारा अपनाए गए कदमों की विस्तार से जानकारी देते हुए गृहमंत्री ने संभावित आतंकवादी हमलों के खतरे को समाप्त करने के लिए बेहतर खुफिया जानकारी और तैयारी की जरूरत पर बल दिया।
चिदंबरम ने कहा,"इन चुनौतियों का सामना करने और इन्हें परास्त करने के लिए हमारे पास एक औजार है और वह है पुलिस। अंतिम विश्लेषण के अनुसार पुरुष और महिला पुलिसकर्मी ही इस लड़ाई में हमारी जीत में सहयोग करेंगे।"
उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन से पुलिसकर्मियों को यह स्पष्ट संदेश जाना जाना चाहिए कि सरकार उन्हें हर स्तर पर हर प्रकार की- वित्तीय, सामग्री से और नैतिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए कर्तव्यबद्ध है।
गृहमंत्री ने बताया कि पिछले साढ़े सात महीनों में आतंक के खिलाफ लड़ाई में 303 पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों ने अपनी शहादत दी है।
नक्सलवाद प्रभावित सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों से चिदंबरम ने अलग से चर्चा की। ये सात राज्य हैं झारखंड,छत्तीसगढ़,आंध्र प्रदेश,महाराष्ट्र,उड़ीसा और पश्चिम बंगाल।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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