'महान भारतीय' थे जिन्ना: जसवंत सिंह

समाचार चैनल सीएनएन-आईबीएन को दिए एक साक्षात्कार में पूर्व विदेश मंत्री सिंह ने यह बात कही। रविवार व सोमवार को प्रसारित होने वाले कार्यक्रम 'डेविल्स एडवोकेट' के लिए करण थापर से बातचीत में सिंह ने कहा, "नेहरू बहुत हद तक केंद्रीकृत नीति में विश्वास करते थे और यही चीज वह देश में लागू करना चाहते थे। जिन्ना एक संघीय नीति चाहते थे, जिसे यहां तक कि गांधी भी स्वीकार करते थे, जबकि नेहरू इससे सहमत नहीं थे। नेहरू 1947 तक संघीय भारत के रास्ते में खड़ा रहे।"
जिन्ना के बारे में गलत धारणा
जसवंत ने बंटवारे के लिए जिन्ना को जिम्मेदार मानने की धारणा को खारिज करते हुए कहा कि यह गलत धारणा है और इसे सुधारने की जरूरत है। सिंह ने कहा, "मैं सोचता हूं कि हमने उन्हें गलत समझा क्योंकि हमें एक भय खड़ा करने की जरूरत थी। हमें एक भय की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि इस उपमहाद्वीप की 20वीं शताब्दी की सबसे बड़ी घटना देश का बंटवारा था।"
जसंवत सिंह द्वारा जिन्ना पर लिखी गई पुस्तक सोमवार को रिलीज होगी। उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तानी नेता के व्यक्तित्व से प्रभावित हैं। सिंह ने यह भी सवाल उठाया कि क्यों देशवासी जिन्ना को एक महान भारतीय करार नहीं देते।
इस बारे में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा, "जिन्ना ने कुछ ऐसा कि जो सही मायने में काफी महत्वपूर्ण था। वह कांग्रेस पार्टी और ब्रिटिश राज के खिलाफ अकेले खड़े हुए, जो सही मायने में उन्हें पसंद नहीं करते थे। गांधी ने स्वयं जिन्ना को महान भारतीय करार दिया है। इसे हम क्यों नहीं याद रखते हैं। हम यह क्यों नहीं सोचते कि गांधी ने उनके ऐसा क्यों कहा।"


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