रोजगारपरक नहीं है स्कूलों और कॉलेजों की शिक्षा: अध्ययन
इस अध्ययन को भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और यूएई को केंद्र बिंदु में रखकर किया गया है। ब्रिटिश संस्था 'एडएक्सेल' ने इसी महीने अध्ययन को जारी किया है।
अध्ययन के अनुसार, "विभिन्न कंपनियों में रोजगार पाने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान का स्कूलों, कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में दी जा रही शिक्षा से कोई मेल नहीं है।"
एडएक्सेल के अंतर्राष्ट्रीय मार्केटिंग प्रबंधक क्लैरे स्टुअर्ट ने पिछले सप्ताह आईएएनएस से कहा, "हमारा मानना है कि भारत में अध्ययन की एक संस्कृति को पैदा करने, काम में महिलाओं को और स्थान देने, शिक्षा और रचनात्मकता पर केंद्रित व्यवसायों का विकास करने और विचार व ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था पर ध्यान दिया जाना चाहिए।"
उन्होंने कहा, "हम इसी वर्ष अक्टूबर में भारत में एक ऐसी परियोजना को व्यवस्थित करेंगे जिसमें उद्योग जगत के अनुकूल योग्यताओं को विकसित किया जा सके और व्यावसायिक शिक्षा प्रणाली को नया रूप दिया जा सके।"
साल भर तक चले इस अध्ययन 'रोजगार के लिए प्रभावी शिक्षा' (ईईई) के लिए इन पांच देशों में 2,000 शिक्षकों और कर्मचारियों का साक्षात्कार किया गया।
एडएक्सेल के निदेशक जेरी जारविस के अनुसार, "इस अध्ययन रिपोर्ट से एक बहस की शुरुआत होती है। अगर हम इन मुद्दों पर पहल कर रहे हैं तो हमें इसे सामूहिक रूप से करने की जरूरत है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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