'बार कॉउंसिल वकीलों के शुल्क निर्धारण व्यवस्था पर विचार करें'

नई दिल्ली, 16 अगस्त (आईएएनएस)। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राज्यों की बार काउंसिल्स को वकीलों के शुल्क निर्धारण की व्यवस्था पर विचार करना चाहिए, ताकि आम लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय मिल सके।

गहलोत रविवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मुख्य न्यायाधीशों के एक दिवसीय सम्मेलन में आयोजित चर्चा सत्र में बोल रहे थे। चर्चा सत्र की अध्यक्षता केन्द्रीय कानून मंत्री डा. वीरप्पा मोईली ने की। भारत के मुख्य न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन भी इस अवसर पर मौजूद थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबों को सस्ता एवं सुलभ न्याय दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की संपूर्ण खंडपीठ को भी बैठकर इस दिशा में प्रयास करने चाहिए। उन्होंने बताया कि राजस्थान में नि:शुल्क विधिक सेवाओं की पात्रता के लिए वार्षिक आय की सीमा 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है।

हाईकोर्ट जजों की नियुक्ति की चयन प्रक्रिया की चर्चा करते हुए गहलोत ने ऐसी व्यवस्था बनाने का सुझाव भी दिया जो वकीलों को जज बनाने के निर्धारित मापदंडों और चयन की कसौटी पर खरा उतरे।

गहलोत ने न्यायालयों में न्यायाधीशों के रिक्त पदों को भरने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि न्यायालयों में रिक्त पदों के कारण लंबित मुकदमों की संख्या बढ़ती है। उन्होंने अखित भारतीय न्यायिक सेवाएं प्रारंभ कर 25 फीसदी पदों को सीधी भर्ती से भरने के संबंध में प्रधान न्यायाधीश के सुझाव पर सहमति प्रकट की।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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