प्रधानमंत्री ने कहा, पीड़ितों के आंसू पोछे न्यायपालिका (लीड-2)
विज्ञान भवन में आयोजित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मुख्य न्यायाधीशों के वार्षिक सम्मेलन में मनमोहन सिंह ने कहा कि गांधी जी जिस आम आदमी की बात करते थे, न्यायपालिका को समाज के उस अंतिम व्यक्ति के आंसू पोछने चाहिए।
देश के न्यायालयों में भारी संख्या में लंबित मामलों पर चिंता जाहिर करते हुए सिंह ने कहा कि लंबित मामलों को कम करने के लिए सरकार न्यायपालिका की हर तरह की मदद करने को तैयार है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "देश के न्यायालयों में भारी संख्या में लंबित मामले न्यायपालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती हैं।"
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के पद फिलहाल पर्याप्त हैं लेकिन रिक्त पदों को शीघ्र भरे जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, " मैं उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से अपील करता हूं कि वे रिक्त पदों को भरने के संबंध में शीघ्र प्रस्ताव बनाएं, जिससे इन पदों को भरा जा सके।"
प्रधानमंत्री ने न्यायपालिका को त्रुटियों से मुक्त होने का आग्रह करते हुए कहा कि मुझे बताया गया है कि निचली अदालतों में न्यायाधीशों के करीब 3,000 पद रिक्त हैं। इन पदों को बिना समय गंवाए भरे जाने की जरूरत है।
उन्होंने देश की न्यायपालिका से एक अखंड तंत्र के रूप में काम करने को कहा और आश्वस्त किया कि सरकार किसी भी मौके पर न्यायपालिका को सहयोग देने में पीछे नहीं हटेगी।
उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में भारत में सबसे अधिक लंबित मामले हैं और मुकदमों में सबसे अधिक समय लगता है। यह विश्व के लिए आश्चर्य और देश के लिए चिंता का विषय है। इनको निपटाने को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
देश में लंबित भारी संख्या में मुकदमों को निपटाने में सर्वोच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि इन लंबित मामलों को निपटाने में न्याय व्यवस्था के हर अंग को एक अखंड तंत्र के रूप में काम करना चाहिए। एक संगठनकर्ता, एक संरक्षक, एक निर्णायक, एक भागीदार और सबसे ऊपर एक आदर्श के रूप में इसमें सर्वोच्च न्यायालय की एक महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि निचली अदालतों में मामले लंबित होने की वजह से जेलों में विचाराधीन कैदियों की बड़ी संख्या हमारे लिए चिंता का विषय है।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर घोषणा की कि मुख्य न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच किए जा रहे मामलों की सुनवाई के लिए 71 और विशेष अदालतों को स्थापित करने के लिए कदम उठाए हैं।
सम्मेलन में अन्य लोगों के साथ ही प्रधान न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन, कानून मंत्री वीरप्पा मोइली सहित सर्वोच्च न्यायालय के कई न्यायाधीश उपस्थित थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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