प्रधानमंत्री का आर्थिक वृद्धि के साथ नई हरित क्रांति पर जोर (राउंडअप)

लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार के साथ ही पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंधों की इच्छा जताई। उन्होंने अपने भाषण में वैश्विक आर्थिक मंदी, आतंकवाद, नक्सलवाद, भुखमरी, गरीबी, भ्रष्टाचार और विदेश नीति का उल्लेख करते हुए अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं।

सिंह ने कहा, "देश में एक और हरित क्रांति की जरूरत है, ताकि कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी की जा सके। इसके लिए किसानों और वैज्ञानिकों को आधुनिक तरीके इजाद करने होंगे।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि में चार फीसदी की विकास दर हासिल करने के लिए सरकार हर कदम उठाएगी। उन्होंने कहा, "हमें भरोसा है कि हम इसे पांच सालों में हासिल कर लेंगे।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था में नौ फीसदी की विकास दर शीघ्र ही हासिल कर ली जाएगी। उन्होंने कहा, "नौ फीसदी की विकास दर पर लौटना हमारी सबसे बड़ी चुनौती है।"

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के लिए एजेंडा तय करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "मुझे विश्वास है कि इस साल के अंत तक काफी कुछ बदलेगा। लेकिन तब तक हम सभी को सहयोग करना चाहिए।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आतंकवाद को कुचलने के प्रति दृढ़ संकल्प है। उन्होंने कहा कि हिंसा और आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि मुंबई हमले के बाद केंद्र सरकार ने आतंरिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सली भारतीय लोकतंत्र की शक्ति को नहीं समझ रहे हैं। केंद्र सरकार नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में राज्य सरकारों की सहायता करने को तैयार है।

मनमोहन सिंह ने कहा कि देश में जरूरी सामानों की कीमतों पर काबू पाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने कहा, "हमारे पास अनाज के प्र्याप्त भंडार है। अनाजों, दालों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर काबू पाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि मानसून की खराब स्थिति को देखते हुए सरकार ने किसानों के लिए ऋण अदायगी की तारीखें आगे बढ़ा दी है। अल्पकालिक ऋणों पर ब्याज की अदायगी में भी सहयोग करने का फैसला किया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, "हम ऐसे किसी विचार को स्वीकार नहीं कर सकते जो तुष्टीकरण की कीमत पर समाज के निचले तबके के कल्याण की बात करता हो। हम अपने पवित्र कर्तव्य के निर्वाह में विश्वास करते हैं।"

उन्होंने कहा, "हमने अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं।"

स्वाइन फ्लू के मसले पर प्रधानमंत्री ने कहा, "इस बीमारी से निपटने के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों के लगातार संपर्क में है। इससे भयभीत होने की जरूरत नहीं है।"

मनमोहन सिंह ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य बदल रहा है। 20वीं सदी में स्थापित बहुपक्षीय संस्थाओं की कार्यप्रणाली और प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।"

उन्होंने कहा, "हमारी विदेश नीति ऐसी होनी चाहिए जो लगातार बदलते हालात में भारत के हितों के लिए काम कर सके। मुझे खुशी है कि हम ऐसा करने में काफी हद तक कामयाब रहे हैं।"

प्रधानमंत्री ने दक्षिण एशिया में विकास का वातावरण तैयार करने के लिए शांति और सद्भावना कायम करने की भारत की इच्छा को सामने रखा।

उन्होंने कहा, "हम अपने पड़ोसियों के साथ शांति और सद्भावना से रहना चाहते हैं। हम ऐसा माहौल पैदा करने की कोशिश करेंगे जो पूरे दक्षिण एशिया के सामाजिक और आर्थिक विकास के हित में हो।"

अमेरिका, रूस, चीन, जापान और यूरोप जैसी दुनिया की बड़ी शक्तियों से भारत के अच्छे संबंधों का उल्लेख करते हुए मनमोहन सिंह ने अफ्रीका, पश्चिम एशिया और लैटिन अमेरिका के साथ भारत के बढ़ते संबंधों के बारे में चर्चा की।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय जीवन में सहयोग और सामंजस्य के नए युग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनता ने पिछले चुनाव में सांप्रदायिक राजनीति को अस्वीकार करते हुए धर्मनिरपेक्ष राजनीति को चुना है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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