भारत-अमेरिका ने बांग्लादेश में आतंकवाद में बढ़ोतरी के प्रति चिंता जताई थी
समाचार पत्र डेली स्टार ने शनिवार को अमेरिकी ऐतिहासिक दस्तावेजों के हवालों से लिखा है, "अमेरिका शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के तत्काल बाद इस बात को लेकर चिंतित हो गया था कि भारत धार्मिक चरमवाद का शिकार बन सकता था।"
दस्तावेज में तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंगर और तत्कालीन भारतीय विदेश मंत्री वाई.बी.चह्वाण, विदेश सचिव केवल सिंह और अमेरिका में तत्कालीन भारतीय राजदूत टी.एन.कौल के बीच लगातार हुई बातचीत का ब्योरा दिया गया है।
विदेश विभाग के अधिकारियों के साथ बातचीत में किंसिंगर ने कहा था, "मैं हमेशा जानता था कि भारत एक दिन बांग्लादेश को आजाद कराने में आगे आएगा। मैंने 1971 में ही इसकी भविष्यवाणी की थी।"
तत्कालीन निक्सन प्रशासन ने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का पूर्ण रूप से विरोध किया था और अमेरिकी नागरिकों की रक्षा के लिए उसने अपने सातवें बेड़े को बंगाल की खाड़ी में भेजा था। भारत ने उसे उस समय अपने खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई के रूप में लिया था।
अधिकांश पारिवारिक सदस्यों के साथ 15 अगस्त 1975 को एक सैन्य विद्रोह में मुजीब के मारे जाने के बाद भारत और अमेरिका ने इस्लामी चरमवाद में और चीन प्रेरित वामपंथी चरमवाद में संभावित बढ़ोतरी के प्रति अपनी चिंताओं का आदान-प्रदान किया था।
चह्वाण और उनके अधिकारियों ने भारत की स्पष्ट चिंताओं से अवगत कराया था कि बांग्लादेश की इस्लामी ताकतें हिंदू अल्पसंख्यकों के लिए खतरा उत्पन्न कर सकती हैं और शरणार्थियों की एक लहर पैदा कर सकती हैं, जिस तरह की स्थिति 1971 में बांग्लादेश की आजादी के समय उत्पन्न हुई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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