प्रधानमंत्री ने आर्थिक, ग्रामीण विकास के साथ दिया नई हरित क्रांति पर जोर (लीड-1)
लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने वैश्विक संस्थाओं में सुधार के साथ ही पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंधों की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने अपने भाषण में वैश्विक आर्थिक मंदी, आतंकवाद, नक्सलवाद, भूखमरी, गरीबी, भ्रष्टाचार और विदेश नीति का उल्लेख करते हुए अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं।
उन्होंने कहा, "देश में एक और हरित क्रांति की जरूरत है, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ाया जा सके। अब वह समय आ गया है जब किसान और वैज्ञानिक आधुनिक तरीकों का इजाद करें।" वर्ष 1960 की क्रांति के बाद देश आनाज के मामले में आत्मनिर्भर हो सका था।
उन्होंने कहा कि कृषि में चार फीसदी की विकास दर हासिल करने के लिए सरकार हर कदम उठाएगी। उन्होंने कहा, "हम आश्वस्त हैं कि हम इसे पांच सालों में हासिल कर लेंगे।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि शीघ्र ही अर्थव्यवस्था में नौ फीसदी की विकास दर को हासिल कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा, "नौ फीसदी की विकास दर पर लौटना हमारी सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए जो भी कदम उठाने की जरूरत पड़ेगी हम उठाएंगे।"
आने वाले दिनों में केंद्र की कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के लिए एजेंडा तय करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "इस साल के अंत तक मुझे विश्वास है कि काफी कुछ बदलेगा। लेकिन तब तक हम सभी को स्थिति से निपटने में सहयोग करना चाहिए।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आतंकवाद को कुचलने को लेकर दृढ़ संकल्प है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक ढांचे में हिंसा और आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हिंसा से किसी भी लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद एक वैश्विक समस्या बन गई है। उन्होंने कहा कि मुंबई हमले के बाद केंद्र सरकार ने आतंरिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सली भारतीय लोकतंत्र की शक्ति को नहीं समझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ अभियानों में केंद्र राज्य सरकारों की सभी प्रकार की सहायता करने के लिए तैयार है।
मनमोहन सिंह ने कहा कि देश में अनाजों, दालों और अन्य जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने कहा, "हमारे पास अनाज के प्र्याप्त भंडार है। अनाजों, दानों और जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। मैं सभी राज्य सरकारों से अपील करता हूं कि वह कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करें।"
उन्होंने कहा कि मानसून में कमी को देखते सरकार ने किसानों के ऋण अदायगी तारीख बढ़ा दी है। सरकार ने लघु काल के ऋणों पर ब्याज की अदायगी में भी अतिरिक्त सहयोग करने का फैसला किया है।
अल्पसंख्यकों से जुड़ी योजनाओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार इनके कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, "हम ऐसे किसी विचार को स्वीकार नहीं कर सकते जो तुष्टिकरण की कीमत पर समाज के निचले तबके के कल्याण की बात करता हो। दरअसल, हम अपने पवित्र कर्तव्य के निर्वाह में विश्वास करते हैं। हमारी सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के भाई-बहनों के कल्याण पर पूरा ध्यान देगी।"
उन्होंने कहा, "हमने अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की है। इनमें और तेजी लाई जाएगी।"
स्वाइन फ्लू से न डरने की जरूरत पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "इस बीमारी से निपटने के लिए केंद्र सरकार राज्यों की सरकारें के लगातार संपर्क में है। भयभीत होने की कोई जरूरत नहीं है। स्वाइन फ्लू के कारण लोगों की दिनचर्या प्रभावित नहीं होनी चाहिए।"
मनमोहन सिंह ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य बदल रहा है। 20वीं सदी में स्थापित बहुपक्षीय संस्थाओं की कार्यप्रणाली और प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।"
उन्होंने कहा, "हमारी विदेश नीति ऐसी होनी चाहिए जो लगातार बदलते हुए हालात में भारत के हितों के लिए काम कर सके। मुझे खुशी है कि हम ऐसा करने में काफी हद तक कामयाब रहे हैं।"
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में मुंबई हमले का हवाला दिया लेकिन न तो पाकिस्तान का और न ही सीमा पार आतंकवाद का उल्लेख किया।
इसके बजाय उन्होंने दक्षिण एशिया में विकास का वातावरण तैयार करने के लिए शांति और सद्भावना से रहने की भारत की इच्छा को सामने रखा।
उन्होंने कहा, "जहां तक हमारे पड़ोसियों का संबंध है, हम उनके साथ शांति और सद्भावना से रहना चाहते हैं। हम ऐसा माहौल पैदा करने की कोशिश करेंगे जो पूरे दक्षिण एशिया के सामाजिक और आर्थिक विकास के हित में हो।"
अमेरिका, रूस, चीन, जापान और यूरोप जैसी बड़ी विश्व शक्तियों से भारत के अच्छे संबंधों का उल्लेख करते हुए मनमोहन सिंह ने अफ्रीका, पश्चिम एशिया और लैटिन अमेरिका के साथ भारत के बढ़ते संबंधों के बारे में बात की।
देशवासियों को सकारात्मक संदेश देते हुए उन्होंने
कहा कि सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ाने के लिए भारत के पास स्वयं पर विश्वास, राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक ताकत है।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय जीवन में सहयोग और सामंजस्य के नये युग का आान किया। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि जनता ने पिछले चुनाव में साम्प्रदायिक राजनीति को अस्वीकार करते हुए ऐसी राजनीति को चुना है जो धर्मनिरपेक्ष है। प्रधानमंत्री ने हर एक को साथ लेकर चलने और देश में सामंजस्य और सहयोग का वातावरण बनाने का वचन दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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