प्रधानमंत्री ने की वैश्विक संस्थाओं में सुधार की वकालत

मुंबई पर 26/11 में आतंकवादी हमले के बाद स्वतंत्रता दिवस पर अपने पहले भाषण में उन्होंने पाकिस्तान का कोई उल्लेख नहीं किया।

मनमोहन सिंह ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य बदल रहा है। 20वीं सदी में स्थापित बहुपक्षीय संस्थाओं की कार्यप्रणाली और प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।"

उन्होंने कहा, "हमारी विदेश नीति ऐसी होनी चाहिए जो लगातार बदलते हुए हालात में भारत के हितों के लिए काम कर सके। मुझे खुशी है कि हम ऐसा करने में काफी हद तक कामयाब रहे हैं।"

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में मुंबई हमले का हवाला दिया लेकिन न तो पाकिस्तान का और न ही सीमा पार आतंकवाद का उल्लेख किया।

इसके बजाय उन्होंने दक्षिण एशिया में विकास का वातावरण तैयार करने के लिए शांति और सद्भावना से रहने की भारत की इच्छा को सामने रखा।

उन्होंने कहा, "जहां तक हमारे पड़ोसियों का संबंध है, हम उनके साथ शांति और सद्भावना से रहना चाहते हैं। हम ऐसा माहौल पैदा करने की कोशिश करेंगे जो पूरे दक्षिण एशिया के सामाजिक और आर्थिक विकास के हित में हो।"

उन्होंने जम्मू एवं कश्मीर का उल्लेख किया लेकिन पाकिस्तान के बारे में बात करने से परहेज किया।

अमेरिका, रूस, चीन, जापान और यूरोप जैसी बड़ी विश्व शक्तियों से भारत के अच्छे संबंधों का उल्लेख करते हुए मनमोहन सिंह ने अफ्रीका, पश्चिम एशिया और लैटिन अमेरिका के साथ भारत के बढ़ते संबंधों के बारे में बात की।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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