फ्लू वायरस की अजीब दास्तान

दिलचस्प यह है कि स्वाइन फ्लू बहुत सी दूसरी घातक बीमारियों के मुकाबले कम खतरनाक है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वाइन फ्लू के वायरस का पैटर्न अब तक पाए जाने वाले फ्लू वायरस से भिन्न है। वे सार्स की याद दिलाते हैं कि जिसकी वजह से दुनिया भर में बहुत सारे लोगों की मौत हुई थी।
अनुमान लगाया गया था आने वाले सालों में इस बीमारी की वजह से लाखों और मौतें होंगी मगर अचानक वह बीमारी गायब हो गई। कुछ ही साल पहले तो एवियन फ्लू ने भी दुनिया को अपनी जकड़ में ले लिया था। काफी समय तक यह अंदेशा जताया जाता रहा कि मनुष्यों में यह महामारी दोबारा सिर उठा सकती है मगर ऐसा नहीं हुआ।
दरअसल इंफ्लूएंजा वायरस की प्रकृति बहुत अनिश्चित है क्योंकि इसका बड़ी तेजी से उत्परिवर्तन होता है। इतिहास बताता है कि इंफ्लूएंजा हर तीस साल बाद एक महामारी का रूप लेकर लौटता है।
जैसा कि इतिहास में दर्ज है 1918 में स्पेनिश फ्लू से दुनिया की एक-तिहाई आबादी संक्रमित हो चुकी थी और पांच करोड़ लोगों के मारे जाने का अनुमान है।
अब याद करते हैं सन 1957 में H2N2 या एशियाई फ्लू के कहर को। पहली पहली लहर में इसने लाखों लोगों को प्रभावित किया था। जब दुनिया की 75 फीसदी आबादी ने इस वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली तो यह विलुप्त हो गया।
आखिरी सबसे बड़ी महामारी 1968 में हांगकांग फ्लू के नाम से जानी जाती है। इसकी वजह से दो सालों में दस लाख लोगों की जान गई। यह H3N2 वायरस आज भी वातावरण में मौजूद है।
दरअसल कोई भी वायरस दो वजहों से खत्म होता है, या तो संवाहक में उसके प्रति जबरदस्त प्रतिरोधक क्षमता पैदा हो जाए या वायरस की शक्ति खत्म हो जाए। प्रतिरोधक क्षमता तभी डेवलप होती है जब आबादी का बड़ा हिस्सा तेजी से संक्रमित होने लगता है। जब भी वायरस नया होता है यह लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है पर एक बार प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाने के बाद यह कमजोर पड़ने लगता है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या हम इस महामारी का अंत देख सकेंगे? डॉक्टरों का कहना है कि इस बात की भविष्यवाणी बहुत मुश्किल है। मगर उनका यह भी कहना है कि ऐतिहासिक तथ्य बताते हैं कि वायरस फ्लू एक समय बात खत्म हो जाता है। हालांकि इस बार इसका स्वरूप अनिश्चित है और वह किसी खास पैटर्न का अनुसरण नहीं कर रहा है।
अमेरिका में 1976 में आश्चर्यजनक रूप से H1N1 का एक केस सामने आया था, जो सिर्फ एक व्यक्ति की जान लेकर गायब भी हो गया।
फिलहाल वैज्ञानिकों के लिए इस नए फ्लू वायरस के सिलसिले में किसी तरह की भविष्यवाणी कर सकना असंभव है मगर बेहतर होगा कि इसे लेकर घबराया न जाए। आखिरकार स्वाइन फ्लू एक दिन में तीन लोगों की जान ले रहा है, जबकि साधारण फ्लू से हर रोज 572 लोगों की मौत होती है।


Click it and Unblock the Notifications