सावधान! आपके ऑफिस में भी हैं जासूस

भारतीय कंपनियों पर किए गए एक अध्ययन किया गया है, जिसेमं 42 प्रतिशत लोगों ने यह माना है कि वो अपने साथी कर्मियों की जासूसी करते हैं। यह अध्ययन वेबसाइट 'यासनी डॉट कॉम पीपुल सर्च' की बेंगलुरू इकाई ने किया है। खास बात यह है कि अधिकांश ने यह माना है कि वो अपने सीनियर्स के राज जानने की हमेशा कोशिश में रहते हैं।
कैसे करते हैं जासूसी
अध्ययन के मुताबिक कंपनियों में काम करने वाले कर्मी अपने साथियों के बारे में जानकारियां हांसिल करने के लिए सोशल नेटवर्किंग का सहारा लेते हैं। इसके अलावा जिन ब्लॉग, फोरम, आदि पर सहकर्मी ने कमेंट पोस्ट किया होता है, उनकी छानबीन कर सर्हकमी की सामाजिक गतिविधियों व छिपी हुईं निजी जानकारियों का पता करने की फिराक में रहते हैं।
हालांकि अध्ययन में पाया गया है कि सहकर्मियों द्वारा जासूसी के बाद दो लोगों के बीच अच्छे संबंध विकसित होने की संभावना ज्यादा रहती है।
अध्ययन के मुताबिक 40 प्रतिशत लोग तो अपने बॉस की निजी जिंदगी, सामाजिक गतिविधियों और शौक के बारे में सिर्फ इसलिए जानने की फिराक में रहते हैं, ताकि समय आने पर वो उन्हें मख्खन लगा सकें। इनमें से अधिकांश लोग पदोन्नति व सैलरी बढ़वाने के लिए बॉस से पर्सनल रिलेशनशिप बनाने के लिए उनके शौक के बारे में बातें करना ज्यादा पसंद करते हैं।
जासूसी में पासवर्ड का इस्तेमाल
आमतौर पर सभी कंपनियों में काम करने वाले व्यक्ति का सिस्टम पर अपना पासवर्ड होता है, लेकिन खास बात यह है कि आईटी कंपनियों में एक-तिहाई कर्मी अपने साथी का पासवर्ड जानने के बाद उसका इस्तेमाल जासूसी के लिए करते हैं।
पासवर्ड चुराने या जानने के बाद अधिकांश लोग साथी की सैलरी डिटेल या ऑफिस से जुड़ी प्लानिंग को जानने की फिराक में रहते हैं। पिछले साल आईटी कंपनियों पर हुए ऐसे ही एक सवेक्षण में पाया गया था कि 33 प्रतिशत लोग अपने सहकर्मी की जासूसी करते हैं। इस साल बढ़कर 42 प्रतिशत हो गई है। यानी कंपनी के अंदर रहकर एकदूसरे की जासूसी करने का ट्रेंड बढ़ रहा है।


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