सभी को मिले समान अवसर और सम्मानपूर्ण जीवन : राष्ट्रपति
स्वतंत्रता दिवस की 63वीं पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करती हुई राष्ट्रपति ने कहा, "विकास की हमारी गाथा में सभी के लिए अवसर और सम्मानपूर्ण जीवन के लिए स्थान होना चाहिए। सामाजिक सशक्तिकरण के लिए अथक कार्य करना होगा।"
उन्होंने कहा, "समाज में ऐसे कमजोर और गरीब लोग हैं जिनकी समृद्घि और विकास प्रक्रिया में पूरी भागीदारी नहीं है और वे उपेक्षित रहते हैं। समाज के इन वगोर्ं को राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल करने की जरूरत है। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल निर्माण के साधन उपलब्ध करवाए जाने चाहिए। इनसे वे योग्य और सक्षम बनेंगे और उनमें भावी अवसरों के प्रति विश्वास पैदा होगा । इससे वे अपने भविष्य का निर्माण खुद कर सकेंगे।"
राष्ट्रपति ने कहा, "बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं। आज वे बालिकाएं कॉलेज जा रही हैं जिनके अभिभावक कभी स्कूल नहीं गए थे। यह विकास की ऐसी घटना है जो एक पीढ़ी के दौरान घटी है। लोग अब शिक्षित होने के फायदे समझने लगे हैं और अब वे अवसरों का लाभ उठाने के लिए तैयार हैं।"
उन्होंने कहा, "बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार बिल का परित होना सभी के लिए शिक्षा के हमारे लक्ष्य को पूरा करने वाला एक ऐतिहासिक विधान है। राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण मिशन से महिलाएं जो हमारी आबादी का आधा हिस्सा हैं, सामाजिक और आार्थिक रूप से सशक्त बनेंगी और वे राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगी। जीवन में आगे बढ़ने के लिए सभी को समान अवसर देना देश की निष्ठा का सिद्घान्त है और एक समावेशी समाज का निर्माण करना हमारा उद्देश्य है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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