भारत शोध व विकास के अंतर्राष्ट्रीय मानक स्थापित कर सकता है : राष्ट्रपति
पाटिल ने स्वतंत्रता दिवस के पूर्व मौके पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, "भारत ज्ञान अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है और पूरे आत्मविश्वास के साथ भविष्य का सामना कर रहा है।"
पाटिल ने कहा, "भारत, शोध व विकास के उच्च मानक स्थापित कर सकता है और ये मानक एक शिक्षित समाज में अंतर्राष्ट्रीय मानक बन सकते हैं।"
अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए पाटिल ने कहा, "विश्व भारत को एक सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में देखना चाहता है। हमें पता है कि हम इस स्थिति को हासिल कर सकते हैं।"
पाटिल ने कहा, "इतिहास से हमें पता चलता है कि प्राचीन काल में भारत एक संपन्न राष्ट्र था और अपनी संपन्नता और वैश्विक महत्व के लिए चर्चित था।"
वैश्विक आर्थिक मंदी का जिक्र करते हुए पाटिल ने कहा, "वैश्विक आर्थिक मंदी की मांग है कि हम इसके प्रभाव से निपटने के लिए अर्थव्यवस्था को व्यवस्थित करें। हमें अपनी विकास दर को ऊपर ले जाने के लिए लगातार काम करना चाहिए।"
राष्ट्रपति ने कहा, "हमारे पास एक विशाल घरेलू बाजार है और अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने के लिए अंतर्निहित क्षमता है। जिस तरह से हम पूरे देश में अधोसंरचना विकास और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों पर ध्यान देते हैं, उसी तरह हमें वृद्धि के नए क्षेत्रों में भी अपने दृढ़ कौशल का परिचय देना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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