स्वाइन फ्लू से बचने के घरेलू उपचार

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स्वाइन फ्लू से ठीक उसी तरह से बचा जा सकता है जैसे कि हम साधारण फ्लू या सर्दी-जुकाम से बचते हैं। इस प्रयास में कुछ घरेलू उपाय कारगर साबित हो रहे हैं। तो बेहतर होगा डाक्टरों के सुझाए सारे एहतियात अपनाने के अलावा हम कुछ घरेलू उपायों पर भी नजर डालें। फ्लू का असर शरीर पर उसी वक्त हो सकता है जब आपके भीतर रोग से लड़ने की झमता में कमी आ रही हो। इसलिए आइए शरीर की रोग निरोधक क्षमता बढ़ाने के कुछ उपायों पर नजर डालें।

कुछ आम जड़ी-बूटियां और पौधे

इसमें सबसे पहले नाम आता है तुलसी का, जो आसानी से भारतीय घरों में उपलब्ध है। यहां इसका धार्मिक से ज्यादा एक उपचारी पौधे के रूप में अहमियत है। तुलसी के पौधे का रस अथवा उसका पेस्ट लाभकारी साबित होगा। यह न सिर्फ व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है बल्कि उपचार के दौरान प्रभावित व्यक्ति को शीघ्र करने में लाभकारी साबित होता है। तुलसी से लाभ पाने का सबसे आसान तरीका है कि हर रोज इसकी पांच अच्छी तरह से धुली हुई पत्तियों का इस्तेमाल करें।

एलोवेरा इन दिनों काफी लोकप्रिय जड़ीबूटी है। दवाइयों तथा सौंदर्य प्रसाधनों में इसका काफी इस्तेमाल किया जाता है। एलोवेरा व्यक्ति की रोग निरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसके एक चम्मच रस को पानी के साथ इस्तेमाल करने से न सिर्फ त्वचा को खूबसूरत बनाया जा सकता है, बल्कि यह स्वाइन फ्लू के असर को कम करने में भी कारगर साबित होगा।

एक और जड़ी-बूटी है जो आपके भीतर फ्लू से लड़ने की क्षमता बढ़ाती है। आम तौर पर हिन्दी में गुलांचा और गुलबेल के नाम से जाना जाता है। संस्कृत में इसे अमृता, चक्रांगी, नागकुमारिका आदि नामों से पुकारते हैं। इसकी एक फुट लंबी शाखा को लेकर तुलसी की छह पत्तियों के साथ 10 से 15 मिनट तक उबालना चाहिए। ठंडा होने पर इसमें थोड़ी काली मिर्च, मिश्री, सेंधा नमक अथवा काला नमक मिलाएं। यदि यह पौधा आपको अपने आसपास नहीं मिलता है तो किसी आयुर्वेद की दुकान से खरीदकर उससे ऐसा ही काढ़ा बना सकते हैं।

कुछ घरेलू उपचार

यदि आपको लहसुन की गंध से अरुचि नहीं है तो सुबह-सुबह इसकी दो कलियां खाली पेट गर्म पानी के साथ लेना शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर साबित हो सकता है। कैंफर अथवा कपूर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। वयस्क चाहें तो इसे पानी के साथ इस्तेमाल कर सकते हैं, वहीं बच्चों को इसका पाउडर आलू अथवा केले के साथ मिलाकर देना होगा। मगर यह ध्यान रखना है कि कपूर का इस्तेमाल महीने में एक बार ही करना पर्याप्त है। इसे बार-बार इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

यदि दूध भाता है तो बेहतर होगा रोज रात में थोड़ी सी हल्दी डालकर हल्का गर्म दूध इस्तेमाल करें। सभी खट्टे फल विटामिन सी से भरपूर होते हैं। आम तौर पर माना जाता है कि सर्दी से बचने का यह बेहतर तरीका है, जो कि स्वाइन फ्लू के लिए भी कारगर साबित होगा।

वैकल्पिक दवाएं

किसी भी बीमारी से बचाव के लिए आम तौर पर होमियोपैथिक दवाओं के इस्तेमाल का खूब चलन है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इन दवाओं के साइड इफेक्ट नहीं हैं। Pyrogenium 200 और Inflenzium 200 की पांच गोलियों को दिन में तीन बार लिया जा सकता है। यदि दवा लिक्विड में है तो इसकी दो-तीन बूंद दिन में तीन बार लेना काफी होगा। हालांकि ये दवाएं विशेष रूप से स्वाइन फ्लू लिए तैयार नहीं हुई हगैं मगर रोकथाम के उपायों में इन दवाओं को शामिल करने में कोई हर्ज नहीं है।

व्यायाम और योग

रोज सुबह टहलें अथवा हल्का-फुल्का व्यायाम करें। यह साबित हो चुका है कि व्यायाम से शरीर में बेहतर प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण होता है। किसी अनुभवी व्यक्ति की देखरेख में अथवा पूरी जानकारी के बाद किया गया प्राणायाम भी आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

और अंत में थोड़े-थोड़े अंतराल पर किसी किटाणुनाशक साबुन से अपने हाथ धोना एक ऐसी अच्छी आदत है जिससे आप खुद को स्वस्थ रख सकते हैं और घातक वायरस के हमले से काफी हद तक बचाव कर सकते हैं।

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