धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिका की निगरानी सूची में भारत (लीड-1)
वाशिंगटन, 13 अगस्त (आईएएनएस)। अल्पसंख्यकों के खिलाफ भारत में बढ़ी हिंसा की घटनाओं, खासकर उड़ीसा में वर्ष 2008 में ईसाई समुदाय के खिलाफ भड़की हिंसा और गुजरात में वर्ष 2002 में मुसलमानों के खिलाफ हुई हिंसा के मद्देनजर एक अमेरिकी संस्था ने भारत को अपनी निगरानी सूची में शामिल किया है।
अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक आजादी आयोग (यूएससीआईआरएफ) द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाने के मामले में भारत सरकार उचित और पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर पाई इसलिए उसे निगरानी सूची में शामिल किया गया है।
यूएससीआईआरएफ के अध्यक्ष लियोनार्ड लियो ने कहा, "यह बहुत खेदजनक है कि भारत जैसे देश में जहां कई धर्मो के लोग रहते हैं वहां अल्पसंख्यकों को न्याय दिलाने के मामले में बहुत ही कम प्रयास किए गए।"
उन्होंने कहा, "भारत के लोकतांत्रिक संगठन जो कानून की बातें करते हैं, राज्य सरकार, न्यापालिका और पुलिस हिंसा प्रभावित अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा नहीं पाई। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के ऊपर कार्रवाई कर सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी।"
यूएससीआईआरएफ ने भारत के अलावा अफगानिस्तान, सोमालिया, बेलारूस, मिस्र, लाओस, तजिकिस्तान, तुर्की, वेनेजुएला, इंडोनेशिया और क्यूबा को भी अपनी सूची में शामिल किया है।
संस्था ने कहा है पिछले साल उड़ीसा के कंधमाल में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) की केंद्रीय समिति के सदस्य स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की नक्सलियों द्वारा की गई हत्या के बाद ईसाई समुदाय को निशाने पर लिया गया था। ईसाइयों पर हुए हमलों को हिन्दू राष्ट्रवादी संगठनों ने अंजाम दिया था। इस दौरान 40 लोगों की मौत हुई थी, हजारों लोग बेघर कर दिए गए थे और दर्जनों गिरिजाघरों को जला दिया गया था।
गौरतलब है कि यह संस्था दुनियाभर में अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाली हिंसा की घटनाओं के मद्देनजर प्रति वर्ष मई महीने में अपनी रिपोर्ट जारी करती है।
इस वर्ष यह संस्था मई महीने में अपनी रिपोर्ट इसलिए जारी नहीं कर सकी क्योंकि वह भारत के उड़ीसा राज्य का दौरा करना चाहती थी लेकिन भारत सरकार ने उसे वीजा देने से इंकार कर दिया था।
संस्था ने अपनी रिपोर्ट के जरिए राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन से कहा है कि वह भारत सरकार से आग्रह करे कि साम्प्रदायिक हिंसा रोकने के लिए वह नए कदम उठाए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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