कृष्ण की लीला से जुड़े 'कोइ-ले घाट' का हुआ नवनिर्माण
जन्माष्टमी की मध्य रात्रि को कंस के कारागार से बालकृष्ण को छाज (टोकरी) में लेकर जब वासुदेव गोकुल जाने के लिए यमुना तट पहुंचे तो यमुना मैया बालकृष्ण के चरणस्पर्श के लिए बढ़ने लगीं। इस पर वासुदेव घबराकर 'कोई ले-कोई ले' कहकर चिल्लाने लगे। यानी कोई आकर मेरे पुत्र को मुझसे ले ले। तब श्रीकृष्ण ने पिता वासुदेव की व्याकुलता देखकर चरण नीचे लटका दी थी, जिससे जमुना मैया चरण स्पर्श कर वापस लौट गईं थीं।
यह पौराणिक लीला जिस स्थान पर हुई थी, वह सदियों से उपेक्षित था। पर इस वर्ष 'द ब्रज फाउंडेशन' ने यहां एक भव्य 'कोई-ले घाट' का निर्माण कराया है।
फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विनीत नारायण ने बताया कि इस स्थान पर बनाए गए भव्य घाट के अतिरिक्त वासुदेव की इसी लीला को दर्शाती आठ फुट ऊंची पत्थर की स्थायी झांकी व शिलालेख भी जल्द ही यहां लगाया जाएगा।
इस परियोजना के लिए आर्थिक सहायता कोलकाता के मूंदड़ा परिवार ने प्रदान की है। इस घाट से जुड़ा पौराणिक महत्व का 'रूचिल वन' भी आज तक उपेक्षित पड़ा है। नारायण ने गत सप्ताह इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के अध्यक्ष एस़ के. बेहुरिया से मिलकर इस वन क्षेत्र को एक सुंदर उपवन का स्वरूप देने की योजना भी तय कर ली है।
मथुरा ऑयल रिफायनरी के ठीक सामने, राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर स्थित यह 'कोई-ले घाट' यमुना दर्शन का सबसे सुन्दर स्थान है। यहां वृंदावन से आती हुई यमुना और गोकुल जाती हुई यमुना के दर्शन होते हैं।
मुगल शासक औरंगजेब ने इस रमणीक स्थल पर अपना एक ख्वाबगाह बनवाया था, जो आज खंडहर बन गया है। नारायण के अनुसार अक्टूबर तक यह पूरा इलाका एक सुंदर दर्शनीय तीर्थस्थल के रूप में विकसित हो जाएगा।
फाउंडेशन के परियोजना समन्वयक राघव मित्तल ने बताया कि ब्रज की लीलास्थलियों के जीर्णोद्धार के लिए द ब्रज फाउंडेशन के अभियान में घाट के निर्माण से यमुना की सेवा का अध्याय भी जुड़ गया है।
ब्रज के 84 कोस क्षेत्र के अर्न्तगत आने वाले मथुरा, भरतपुर व पलवल जिले के 1300 गांवों, 1000 से अधिक पौराणिक कुण्डों, 137 दिव्य वनों, 72 वर्ग किलोमीटर में फैले पर्वतों और भगवान राधाकृष्ण की हजारों दिव्य लीलास्थलियों के जीर्णोद्धार में 'द ब्रज फाउंडेशन' जुटा हुआ है।
फाउंडेशन अब तक ब्रज में 36 दिव्य कुण्डों और तीन ऐतिहासिक भवनों का जीर्णोद्धार करने के साथ ही एक वन को संवार चुका है। वृंदावन के खंडहर पड़े ब्रह्म कुण्ड को ब्रज का सर्वाधिक आकर्षक कुंड बनाया जा चुका है।
फाउंडेशन के प्रेरणा स्रोत बरसाना के विरक्त संत रमेश बाबा का कहना है, "भक्तगण करोड़ों रुपया निर्थक कार्यो में खर्च करते हैं जबकि धामसेवा का उद्देश्य इन हजारों लीलास्थलियों का जीर्णोद्धार होना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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