कुपोषण से निपटने के लिए नीतियां बदले सरकार : विशेषज्ञ
जाने माने कृषि वैज्ञानिक और देश में हरित क्रांति से जनक पी. साईनाथ ने आईएएनएस से बातचीत में कहा एक कृषि प्रधान देश होते हुए भी भारत को दूसरे देशों से दाल जैसी आवश्यक वस्तुओं का आयात करना पड़ रहा है। इसके लिए सरकार की नीतियों में कमियां हैं।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की योजनाओं को ठीक तरीके से लागू नहीं किया गया, जिसके चलते आज आम आदमी के उपभोग की प्रोटीन युक्त वस्तु दाल की कीमत सौ रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।
उल्लेखनीय है कि कैलीफोर्निया स्थित अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति शोध संस्था की रपट पर आधारित 88 विकासशील देशों की सूची में भारत का स्थान 66वां है।
दालों की कीमतों में बढोत्तरी के संबंध में खाद्य राज्यमंत्री के. वी. थॉमस ने हाल ही में संसद में कहा था कि दालों की कम बुआई और किसानों को उनके उत्पाद की सही कीमत नहीं मिलने के कारण यह समस्या पैदा हुई है।
मंत्री ने कहा था कि देश में प्रति व्यक्ति आनाज की खपत में कमी आई है। ग्रामीण भारत में वर्ष 2004-05 की तुलना में दालों की प्रति व्यक्ति खपत 760 ग्रा से घटकर 710 ग्राम हो गया है जबकि अनाज की खपत 13.4 किलो से घटकर 12.12 किलो हो गया है।
शहरी क्षेत्रों में इस अवधि के दौरान दालों की खपत 860 ग्राम से घटकर 820 ग्राम हो गई जबकि अनाज की खपत 10.6 किलो से घटकर 9.94 किलो हो गया
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ सालों में तीव्र आर्थिक विकास के बाद भी भारत की स्थिति करीब 25 अफ्रीकी देशों से भी खराब है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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