भारत पर अल्पसंख्यकों की हिफाजत न कर पाने का आरोप
अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक आजादी मामलों के अमेरिकी आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने वर्ष 2009 के लिए भारत पर जारी की गई अपनी एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है। यह रिपोर्ट बुधवार को जारी की गई।
यूएससीआईआरएफ ने न सिर्फ भारत को अपनी सूची में शामिल किया है बल्कि उसे अफगानिस्तान, सोमालिया, बेलारूस और क्यूबा के समतुल्य रखा है।
यूएससीआईआरएफ की ओर से जारी किए गए एक बयान के मुताबिक अल्पसंख्यकों की रक्षा करने के मामले में भारत सरकार ने अपर्याप्त कदम उठाए।
संस्था ने कहा है कि देश में बढ़ी साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाओं, खासकर उड़ीसा में वर्ष 2008 में ईसाई समुदाय के खिलाफ भड़की हिंसा और गुजरात में वर्ष 2002 में मुसलमानों के खिलाफ हुई हिंसा के मद्देनजर भारत को भी इस सूची में शामिल किया गया है।
यूएससीआईआरएफ के अध्यक्ष लियोनार्ड लियो ने कहा, "यह बहुत खेदजनक है कि भारत जैसे देश में जहां कई धर्मो के लोग रहते हैं वहां अल्पसंख्यकों को न्याय दिलाने के मामले में बहुत ही कम प्रयास किए गए।"
गौरतलब है कि यह संस्था दुनियाभर में अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाली हिंसा की घटनाओं के मद्देनजर प्रति वर्ष मई महीने में अपनी रिपोर्ट जारी करती है।
इस वर्ष यह संस्था मई महीने में अपनी रिपोर्ट इसलिए जारी नहीं कर सकी क्योंकि वह भारत के उड़ीसा राज्य का दौरा करना चाहती थी लेकिन भारत सरकार ने उसे वीजा देने से इंकार कर दिया था।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल उड़ीसा के कंधमाल में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) की केंद्रीय समिति के सदस्य स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की कथित तौर पर नक्सलियों द्वारा हत्या कर दी गई थी।
यूएससीआईआरएफ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि स्वामी लक्ष्मणानंद की हत्या के बाद ईसाई समुदाय को निशाने पर लेते हुए न सिर्फ गिरिजाघरों बल्कि उनके घरों को भी जलाया गया। ईसाइयों पर हुए हमलों को हिन्दू राष्ट्रवादी संगठनों ने अंजाम दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications